अध्याय 127 निर्णायक साक्ष्य

आख़िरकार वह सब किसी तरह झेलकर निपट गया। एला उनींदी थी और फोन पकड़े-पकड़े ही सो गई।

उसे कई उलझे हुए सपने आए—वही काली कार, जिसने उसे टक्कर मारी थी और वह उछलकर दूर जा गिरी थी; वह खून से लथपथ थी, और खून के तालाब में पड़ी थी।

एला अचानक उस डरावने सपने से चौंककर उठ बैठी। उसने अपने माथे को छुआ—वह पसीने से...

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