अध्याय 182

आख़िरकार ऑरा ने उसके सीने से चेहरा उठाया। रो-रोकर उसकी आँखें लाल और सूजी हुई थीं।

वह मेरी तरफ़ मुड़ी, सिसकियों से काँपती आवाज़ में बोली, “मम्मी, पापा कब ठीक होंगे?”

मैं उसके पास घुटनों के बल बैठ गई और टिशू से उसके आँसू हल्के-हल्के पोंछे। “चिंता मत करो, बेटा। डॉक्टर और नर्सें बहुत अच्छे हैं। तुम्ह...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें