अध्याय 202 - नया

मार्गॉट का नज़रिया

सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ।

इतनी तेज़ी से कि दिमाग़ समझ ही नहीं पाया।

एक पल पहले मैं उसकी तरफ झुकी हुई थी, उसकी अभी‑अभी कही बातों की गूँज में खोई हुई… और अगले ही पल—

उसके होंठ मेरे होंठों पर थे।

फिर उसके हाथ।

नरम, मगर मज़बूत।

राह दिखाते हुए।

और अचानक मैं उसे जकड़कर उसकी गोद ...

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