अध्याय 40 - तूफ़ान

मार्गो की नज़र से

वो पहले तो कुछ बोला ही नहीं।

बस वहीं खड़ा रहा। उसकी नज़रें जैसे मुझे आर-पार जला रही थीं।

मुझे लगा उसकी आँखें मेरे जिस्म के हर कोने को किसी जलती हुई सर्चलाइट की तरह टटोल रही हैं — परखती हुई, हिसाब लगाती हुई, जैसे मेरे आखिरी पलों की गिनती शुरू हो गई हो…

उस ख़ामोशी की आवाज़, व...

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