अध्याय 1: जुनून की रात

हवेली के आलीशान बेडरूम में शार्लट फ़ॉस्टर जेम्स मार्टिन के ऊपर सवार थी।

जेम्स के हाथ बँधे हुए थे और वह इतना नशे में था कि विरोध भी नहीं कर पा रहा था। शार्लट ने झटपट उसके कपड़े फाड़कर उतार दिए।

जेम्स की नंगी छाती और तराशी हुई मांसपेशियाँ साफ़ दिख रही थीं, और शार्लट खुद को रोक नहीं पाई—उसने हाथ फेरकर उन्हें महसूस किया।

“वाह, तुम तो सच में बड़े फिट हो,” उसने कहा।

जेम्स की आँखों पर पट्टी बँधी थी, और उसकी आवाज़ ठंडी और खिंची हुई थी। “शार्लट, तुम आग से खेल रही हो। अभी मुझे छोड़ दो!”

शार्लट ने होंठों पर टेढ़ी मुस्कान लाकर यूँ ही कहा, “हम पति-पत्नी हैं, तो ये बिलकुल सामान्य है!”

जेम्स ने पूरी ताक़त से छटपटाया, मगर वह बहुत कमज़ोर था। “आज अगर तुमने मुझे छुआ, तो ज़िंदगी भर पछताओगी!”

उसके हर शब्द में धमकी टपक रही थी, और शार्लट अनायास ही पीछे हट गई।

वह उलझी हुई नज़र से जेम्स को देखने लगी। आँखों पर बँधी पट्टी ने उसकी तेज़ निगाहें छिपा दी थीं, मगर उसकी ऊँची नाक और सही आकार वाले होंठ साफ़ पहचाने जा सकते थे।

वह लगभग नरम पड़ने ही वाली थी कि उसे अपने तीन साल के विवाह में अनदेखी और अपमान के वे सारे पल याद आ गए।

उसके भीतर जिद उफन पड़ी, और उसने दृढ़ होकर जेम्स की पैंट खींचकर उतार दी।

“तुम…!” जेम्स इतना गुस्से में था कि बोल ही नहीं पाया।

उसने कभी सोचा भी नहीं था कि हमेशा आज्ञाकारी और सहमी रहने वाली शार्लट उसे नशा देकर बाँधने की हिम्मत कर जाएगी! वह कुछ कहने ही वाला था कि अचानक उसे एक भारी, दबाव भरी नरमी का एहसास हुआ।

जेम्स के चेहरे के भाव शून्य हो गए।

उधर शार्लट का नाज़ुक, खूबसूरत चेहरा दर्द से सिकुड़ गया था।

किसी ने उसे कभी क्यों नहीं बताया कि इतना दर्द होगा?

आज के लिए तैयार होने को उसने ढेर सारे “सीखाने वाले” वीडियो लगातार देखे थे।

शार्लट ने दर्द दबाकर थोड़ा सा हिली, मगर इतना चुभा कि उसके मुँह से अनायास एक सिसकी निकल गई।

उसी पल जेम्स ने अपने हाथ छुड़ा लिए और पलटकर उसे नीचे कर दिया—पल भर में बाज़ी उसके हाथ आ गई।

उसकी रत्न-सी आँखें चाहत और आक्रामकता से दहक उठीं, और उसने शार्लट की कलाइयाँ कसकर पकड़ लीं।

“जब तुम्हें यही चाहिए, तो फिर मैं पूरा करके दिखाता हूँ!” उसने कहा।

शार्लट दर्द में छटपटाई; उसकी आँखें आँसुओं से चमक उठीं और उसने दाँत गड़ाकर जेम्स के कंधे में काट लिया।

उस पल वह उसके बर्फ़ जैसे कठोर आवरण को चीरता हुआ किसी जंगी जहाज़ जैसा लग रहा था।

शार्लट की आँखें लाल हो उठीं—टूटी हुई, फिर भी चमकती खसखस के फूल जैसी—एक नज़र में ही दया जगा देने वाली।

आख़िर में जेम्स झुका और उसकी आँखों के किनारों पर जमा आँसू चूमकर पोंछ दिए।

गर्जता हुआ जुनून नरम पड़ गया, वसंत की धारा की तरह धीमे-धीमे बहने लगा।

सब खत्म होने पर जेम्स गहरी, शांत नींद में डूब गया।

मगर शार्लट ने अपने शरीर पर पड़े चुंबन के निशानों को देखा, थकी हुई देह को घसीटकर उठी, हस्ताक्षर किए हुए तलाक़ के काग़ज़ पीछे छोड़ दिए, और बिना एक पल रुके शहर से निकल गई।

वह विदेश जाने वाली उड़ान में बैठी थी। खिड़की के बाहर शहर की जगमगाती रात भागती दिख रही थी, और उसके भीतर कड़वाहट गहरी होती जा रही थी।

शार्लट और जेम्स की डोर तो दुनिया में कदम रखने से पहले ही बाँध दी गई थी—उनकी दादियाँ पक्की सहेलियाँ थीं।

मगर फ़ॉस्टर परिवार की हैसियत सालों पहले ही मिट चुकी थी—धोखे के एक झटके में सब कुछ उजड़ गया।

शार्लट के दादा-दादी सदमे और टूटन में चल बसे, उसके पिता को आत्महत्या करने पर मजबूर किया गया, और उसकी माँ गायब हो गई।

एक ही रात में उसकी ज़िंदगी स्वर्ग से नरक में जा गिरी—वह इतनी कंगाल हो गई कि स्कूल की फीस तक नहीं भर पाती थी।

जेम्स की दादी ने ही शार्लट को नई पहचान दिलाई और उसकी पढ़ाई का खर्च उठाया।

मरते वक़्त उन्होंने जेम्स से क़सम ली कि वह शार्लट से शादी करेगा और हमेशा उसके साथ भलाई से पेश आएगा।

जेम्स के प्रति एहसान और प्रेम के कारण शार्लट ने अपनी पढ़ाई छोड़कर घर-गृहस्थी अपनाने का फैसला कर लिया।

इससे उसके मार्गदर्शक, ब्रैड थॉर्नटन, को बहुत निराशा हुई।

स्कूल के आख़िरी दिन ब्रैड ने उससे कहा था कि किसी आदमी पर अपनी सारी उम्मीदें टिकाने का मतलब आखिर में केवल निराशा है।

मगर शार्लट तब जवान थी और उसे भरोसा था कि प्यार सब कुछ जीत सकता है।

उसने सोचा था कि वह अपना पूरा दिल जेम्स को दे देगी, तो एक दिन उसकी बर्फ़ीली कठोरता पिघल जाएगी—पर हक़ीक़त ने जोरदार थप्पड़ मारा, और ब्रैड की बातें डरावनी तरह से सच निकलीं।

तीन साल की लगातार अनदेखी और तिरस्कार ने उसे भीतर तक ज़ख़्मी कर दिया था।

आख़िरी चोट पिछले हफ्ते की नीलामी में लगी।

मिसेज़ मार्टिन होते हुए भी शार्लट को जेम्स के साथ नीलामी में जाने की इजाज़त नहीं मिली। वह घर पर बैठकर सिर्फ़ मनोरंजन समाचार देख सकी—कैमरों की चमक के बीच जेम्स को डेज़ी लिन के साथ देखते हुए, और लोगों को उन्हें “परफेक्ट जोड़ी” कहकर सराहते सुनते हुए।

जेम्स ने डेज़ी के लिए गहनों पर लाखों खर्च कर दिए थे, और यह सब चार्लोट को एक बेरहम मज़ाक जैसा लगता था।

अपने फैसले पर उसे कोई पछतावा नहीं था, और वह उसके नतीजों का सामना करने के लिए तैयार थी।

तलाक़ के कागज़ इस शादी में उसकी आख़िरी गरिमा थे।

शाम को जेम्स की आँख खुली तो वह सिर के दर्द से कराहते हुए माथा मल रहा था। वह चार्लोट से हिसाब करने ही वाला था कि मेज़ पर रखे तलाक़ के कागज़ देखकर सन्न रह गया।

वक़्त पंख लगाकर उड़ गया, और पलक झपकते ही छह साल बीत गए।

आज आरएनएस अवॉर्ड्स का समारोह था—बायोमेडिकल रिसर्च में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी पहचान—और अनगिनत लोग इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने का सपना देखते थे।

मंच पर होस्ट ने जोश से घोषणा की, “इस पुरस्कार समारोह में आने के लिए आप सभी का धन्यवाद। आइए, आज की विजेता—सुश्री फॉस्टर—का स्वागत करते हैं।”

रोशनी एकदम बदल गई, और स्पॉटलाइट गाउन पहने चार्लोट पर आ टिकी।

वह सीधी, गरिमामयी खड़ी थी—उसका नाज़ुक चेहरा मानो किसी ईश्वरीय कलाकार की संजोई हुई कृति हो।

सुनहरे गाउन में वह एक-एक कदम रखती हुई मंच की ओर बढ़ी।

ब्रैड—एक सौम्य बुज़ुर्ग—ने गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए उसके गले में पदक पहनाया और उसे पुरस्कार सौंपा।

वह बोले, “चार्लोट, मुझे खुशी है कि तुम वापस अपने रास्ते पर आ गई हो। तुम्हारे करियर की चोटी तुम्हारा लक्ष्य होनी चाहिए—किसी आदमी के पीछे-पीछे उसकी बिना तनख़्वाह की नौकरानी बनकर नहीं।”

चार्लोट ने दोनों हाथों से ट्रॉफी थाम ली। उसकी आँखें भावनाओं से भर आईं। छह साल की मेहनत उसके सामने जैसे एक ही पल में सिमट आई—और आज उसने यह पुरस्कार जीतकर खुद को साबित कर दिया था।

उसने दृढ़ता से सिर हिलाया और सच्चाई से कहा, “इतने समय तक मुझ पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद। मैं अपना रिसर्च आगे बढ़ाती रहूँगी—और यहाँ रुकने वाली नहीं हूँ।”

ब्रैड ने कहा, “यह सुनकर अच्छा लगा। मुझे तुमसे बहुत उम्मीदें हैं।”

पुरस्कार समारोह के बाद चार्लोट ब्रैड के साथ रिसर्च इंस्टिट्यूट लौट आई।

वह नीचे कुछ कागज़ी काम निपटा रही थी और ऊपर जाने में थोड़ा देर हो गई। तभी उसे ब्रैड की झुँझलाहट भरी आवाज़ सुनाई दी, “क्या तुम लोग इंस्टिट्यूट को खोलकर पुर्जे-पुर्जे करने पर तुले हो?”

चार्लोट का दिल कस गया, और वह तुरंत दूसरी मंज़िल की ओर दौड़ी।

अंदर का नज़ारा देखते ही उसके भीतर इतना तीखा गुस्सा उठा कि वह लगभग बेहोश ही हो जाती।

नोआ फॉस्टर और एंडी फॉस्टर—दोनों रंग-बिरंगे कार्टून वाले सूट पहने—फर्श पर बैठे थे, और उनके चारों ओर उपकरणों के पुर्जे बेतरतीब बिखरे पड़े थे।

यह इंस्टिट्यूट के सबसे महँगे उपकरणों का सेट था—कीमत लगभग करोड़ों में, नौ अंकों के करीब।

“तुम लोग ये क्या कर रहे हो?” चार्लोट सख़्त चेहरा लिए भीतर घुस आई।

नोआ के छोटे से चेहरे पर मिट्टी के धब्बे थे, फिर भी उसकी शक्ल पूरी गंभीर थी। उसने एक पुर्जा उठाकर दिखाया, “मम्मी, हम प्रतियोगिता कर रहे हैं,” उसने पूरे मन से कहा।

चार्लोट ने चौंककर पूछा, “प्रतियोगिता?”

एंडी बीच में बोला, “हाँ मम्मी, मैं और नोआ देख रहे हैं कि कौन उपकरण जल्दी जोड़ता है।”

कहते हुए वह मेहनत से एक पुर्जा फिट करने में लगा रहा।

नोआ और एंडी—दोनों बच्चे चार्लोट के थे, जिन्हें उसने मिराथिया आने के बाद जन्म दिया था।

चार्लोट ने कभी नहीं सोचा था कि जेम्स का असर इतना होगा कि एक रात की बात से तीन बच्चों की गर्भधारण हो जाए।

दुर्भाग्य से, सबसे छोटी बेटी जन्म के समय दम घुटने से बहुत जल्दी चल बसी।

नोआ और एंडी को बचपन से ही मशीनें जोड़ने-खोलने में बेमिसाल दिलचस्पी थी। घर का लगभग हर फर्नीचर वे खोलकर फिर जोड़ चुके थे—और अब उनकी निगाह इंस्टिट्यूट पर आ गई थी।

चार्लोट ने उनके ईमानदार, प्रतिस्पर्धी चेहरों को देखा और मन ही मन खुद को याद दिलाया—‘ये तुम्हारे ही बच्चे हैं।’

वह बोली, “अभी, इसी वक्त हम मिलकर इस उपकरण को फिर से जोड़ेंगे। और आज के बाद, मेरी अनुमति के बिना तुम दोनों इंस्टिट्यूट में कदम नहीं रखोगे!”

नोआ ने बड़ी-बड़ी उदास आँखों से उसे देखा। “मम्मी…”

लेकिन चार्लोट का चेहरा कठोर ही रहा। “कितनी भी मिन्नत कर लो, मेरा फैसला नहीं बदलेगा। इस पर कोई बहस नहीं!”

“समझ गया,” एंडी ने भी उतरे हुए चेहरे के साथ कहा।

उनकी मिल-जुलकर की कोशिश से उपकरण जल्दी ही दोबारा जोड़ दिया गया। चार्लोट ने जैसे ही राहत की साँस ली, उसने मुड़कर देखा—ब्रैड का चेहरा गंभीर था।

ब्रैड बोले, “चार्लोट, इंस्टिट्यूट का नया प्रोजेक्ट एल्डोरिया में है। यह हमारे रिसर्च की आगे की दिशा के लिए बेहद अहम है, और इसकी निगरानी के लिए तुम सबसे उपयुक्त हो।”

एल्डोरिया का नाम सुनते ही चार्लोट का चेहरा पीला पड़ गया—क्योंकि वह जानती थी, जेम्स वहीं था।

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