अध्याय 8 राजकुमारी को संरक्षित करने की आवश्यकता है

शार्लट की उत्सुकता के उलट, खबर सुनते ही एंडी और नोआ के चेहरे उतर गए। उन्हें ज़रा भी खुशी नहीं हुई, लेकिन यह सोचकर कि शार्लट कितनी मायूस हो जाएगी, वे मन मसोसकर साथ चल पड़े।

शार्लट ने एंडी और नोआ की अनिच्छा भरी नज़रों को अनदेखा किया और उन्हें प्री-स्कूल ले गई।

पहला दिन था, इसलिए शार्लट ने उन्हें हाज़िरी रजिस्टर में नाम लिखवाने में मदद की और उनकी टीचर से मिली।

सब कुछ ठीक-ठाक हो जाने के बाद वह उनके सामने उकड़ूँ बैठी, मुस्कुराई और बोली, “स्कूल में कोई शरारत नहीं करनी, अच्छे बच्चे बनकर रहना, और छुट्टी के बाद मैं तुम्हें लेने आऊँगी, ठीक है?”

एंडी और नोआ ने आज्ञाकारी-सा सिर हिला दिया।

शार्लट को जाते देख वे अपनी क्लास में चले गए।

टीचर ने सबका ध्यान खींचने के लिए ताली बजाई। “बच्चो, आज हमारी क्लास में दो नए दोस्त आए हैं। चलो, इनका स्वागत करते हैं और ये अपना परिचय दें, ठीक है?”

तुरंत सारी नज़रें एंडी और नोआ पर टिक गईं।

उनके प्यारे चेहरे देखकर पूरी क्लास खुशी से बोली, “ठीक है!”

प्यारी चीज़ें पसंद आना इंसानी फितरत है—बच्चों की भी।

एंडी और नोआ बिल्कुल घबराए हुए नहीं लगे। वे क्लास के आगे गए और आत्मविश्वास से अपना परिचय देने लगे।

“हाय सब लोग, मैं नोआ हूँ। उम्मीद है हम सब दोस्त बनेंगे।”

“हाय सब लोग, मैं एंडी हूँ।”

उनकी मुस्कान और मासूम-सी अदा ने पल भर में सबका दिल जीत लिया। बच्चे एंडी और नोआ को टकटकी लगाए देखते रह गए।

टीचर को भी यह अपनापन देखकर अच्छा लगा। उसने एंडी और नोआ को बैठने की जगह दिखाई।

और हैरानी की बात—उनके ठीक सामने एमा बैठी थी।

एमा ने जैसे ही उन्हें देखा, उसकी आँखें चमक उठीं और उसने उन्हें मीठी-सी मुस्कान दी।

लेकिन एंडी और नोआ को याद था कि शार्लट को कैसे सताया गया था।

एमा के दोस्ताना इशारे को अनदेखा करते हुए उन्होंने चेहरे पर सख्ती बनाए रखी।

एमा देखती रही, उसकी आँखों की चमक फीकी पड़ गई। वह सिर झुकाकर बैठ गई—जैसे उसे चोट लगी हो।

उसे समझ नहीं आया कि वे अचानक उससे बात क्यों नहीं करना चाहते।

एमा ऑटिज़्म से जूझती थी और बहुत कम बोलती थी। क्लास में उसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता था।

इसलिए एंडी और नोआ से मिलकर वह सचमुच खुश हुई थी।

लेकिन ऐसा लग रहा था कि एंडी और नोआ उसे पसंद नहीं करते।

यह सोचकर एमा का दिल बैठने लगा, उसे रोना-सा आने लगा। उसकी उँगलियाँ आपस में कसकर मरोड़ने लगीं।

एंडी और नोआ को एमा की उदासी का अहसास हुआ और उन्हें भी थोड़ा बुरा लगा।

लेकिन शार्लट की उदासी याद आते ही उन्होंने अपने दिल को पत्थर कर लिया।

उनकी दुनिया में सबसे ज़्यादा अहमियत शार्लट की थी।

भले ही वे जेम्स की गलती की सज़ा एमा को नहीं दे सकते थे, लेकिन वे यह भी जानते थे कि उससे दोस्ती नहीं कर सकते।

एंडी और नोआ ने, मानो जानबूझकर, बहुत जल्दी बाकी बच्चों के दिल जीत लिए।

एमा चुपचाप उन्हें देखती रही।

उन्हें बाकी बच्चों के साथ इतनी आसानी से घुलते-मिलते देखकर वह और भी टूट गई, और उसका सिर और नीचे झुक गया।

वह उन्हें भीतर-ही-भीतर बहुत ईर्ष्या से देखती थी, चाहती थी कि वह भी उनकी तरह हँस-खेल सके, उनके साथ शामिल हो सके।

भले ही नोआ और एंडी ने तय कर लिया था कि वे एमा के साथ नहीं खेलेंगे, फिर भी वे उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर पाए। उसे अकेले बैठे देखकर एंडी के सीने में एक टीस-सी उठी—जैसे किसी छोड़े हुए छोटे-से पिल्ले को देख लिया हो।

नूह ने बेपरवाह-सा दिखने की कोशिश करते हुए पूछा, “तुम लोग उस लड़की के साथ क्यों नहीं खेलते?”

एक थोड़ा-सा गोल-मटोल लड़का बोल पड़ा। “वो बोलती ही नहीं। हम उसे खेलने को कहते हैं तो हमें अनदेखा कर देती है। और अगर उसे कहीं चोट लग गई तो टीचर हमें डाँटती हैं। हमें ये झंझट नहीं चाहिए।”

नूह को भी ये बात सचमुच सिरदर्द लगी।

उसने मन ही मन एम्मा को “मुश्किल” का तमगा दे दिया, लेकिन फिर भी उसकी तरफ़ नज़र टिक ही जाती थी।

वो जेम्स की किसी दूसरी औरत से हुई बच्ची थी, इसलिए नूह उस पर ध्यान देता था—बिलकुल भी तरस खाकर नहीं!

लड़का आगे बोला, “ऐसा नहीं है कि हम उसके साथ खेलना नहीं चाहते! कभी-कभी हमें उस पर दया आ जाती है और हम मदद करने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन हम जो भी करें, वो जवाब ही नहीं देती। कभी-कभी तो हमें मार भी देती है।”

उसने सिर हिलाया और जोड़ दिया, “कुछ बच्चे उसे चिढ़ाते हैं क्योंकि वो हमेशा अकेली रहती है। हम उन्हें भगा देते हैं, लेकिन वो हमें कभी धन्यवाद तक नहीं कहती। कितनी बदतमीज़ी है! सब गवाही दे देंगे!”

आसपास बैठे बच्चे सहमति में सिर हिलाने लगे।

नूह की आँखों में एक उलझा-सा भाव चमक गया।

जब शार्लट उन्हें मिराथिया में साथ रखती थी, वहाँ माहौल भले ही ज़्यादा खुला था, फिर भी बहुत लोग उन्हें “बाप के बिना बच्चे” कहकर ठप्पा लगा देते थे और सताते थे।

एम्मा थोड़ी-सी ज़्यादा किस्मतवाली थी, पर बहुत ज़्यादा नहीं। उसे कोई सताता नहीं था, लेकिन वो फिर भी अकेली थी—बिना किसी दोस्त के—चुपचाप अपनी कसक सहती हुई।

वो एहसास सच में असह्य होता है।

अब एम्मा को ऐसे देखकर, एंडी और नूह का दिल बस इतना कठोर नहीं हो पाया।

असल में उसने कोई गलती की ही नहीं थी।

ये सोचकर एंडी मुस्कुराया और एम्मा का हाथ थाम लिया।

“मुझे तो ये बहुत प्यारी लगती है—एक छोटी-सी राजकुमारी, जिसे सुरक्षा चाहिए!” उसने कहा, “शायद ये बस शर्मीली है। हम इसके साथ खेलेंगे तो ये खुश हो जाएगी।”

बच्चों के मन में बैर ज़्यादा देर टिकता भी नहीं।

ऊपर से एम्मा सच में काफ़ी क्यूट थी। उन्हें उससे नफ़रत नहीं थी; बस वो जब उनसे घुलती-मिलती ही नहीं थी, तो वे दूरी बना लेते थे।

तो नूह और एंडी के हौसला देने पर बाकी बच्चों ने भी सिर हिलाया और मुस्कुरा दिए। “तो फिर हम आज से इसके साथ खेलेंगे।”

पहले वाले लड़के ने अपनी छोटी-सी मुट्ठी भींची और दृढ़ता से बोला, “मैं रोज़ इसके साथ खेलूँगा। अगर कोई एम्मा को तंग करेगा, तो मैं उसे पीट दूँगा।”

एम्मा की प्रतिक्रिया भले धीमी थी, पर वो बेवकूफ़ नहीं थी। उसे एंडी और नूह की मंशा तुरंत समझ आ गई, और उसने सिर हिला दिया।

“ठीक है,” उसने धीमे से कहा, और नूह व एंडी के कपड़े कसकर पकड़ लिए—छोड़ने का नाम नहीं।

बच्चों का मूड जल्दी बदलता है, और थोड़ी ही देर में सब इधर-उधर हो गए।

उनके जाते ही नूह का चेहरा ठंडा पड़ गया।

उसने कहा, “छोड़ो।”

उन्होंने उसे माफ़ नहीं किया था!

एम्मा के आँसू तुरंत गिर पड़े। वो सिसकते हुए उनकी तरफ़ देखने लगी।

वो रो पड़ी, “नहीं, प्लीज़!”

एम्मा का रोना नूह और एंडी को और चिढ़ाने लगा। वे उसे डाँटना चाहते थे, मगर दिल नहीं कर पा रहा था।

उसे इतना बेबस देखकर, और फिर भी उन्हें मनाने की कोशिश करते हुए देखकर, नूह ने आखिरकार अनिच्छा से ढील दे दी।

उसने कहा, “ठीक है, रोना बंद करो। आज से हम तुम्हारे साथ खेलेंगे।”

“पिंकी प्रॉमिस!” एम्मा ने अपनी छोटी उँगली आगे बढ़ाई और डरते-डरते उनकी तरफ़ देखा।

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