अध्याय 129

वॉन के उलट, जिसके चेहरे से मानो महत्वाकांक्षा टपक रही थी, सेड्रिक का भाव शांत ही रहा। कितने ही उतार-चढ़ाव देख चुके आदमी की तरह उसने बस सोच में आँखें हल्की-सी सिकोड़ लीं—जज़्बात पढ़ पाना नामुमकिन, बस उनकी गहराई में एक धुंधली-सी, रहस्यमयी चमक झिलमिला गई।

यॉर्क ग्रुप की साख को अभी-अभी बड़ा झटका लगा था...

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