अध्याय 161

कैटनिस की आँखें, जो कभी चाहत, नर्माहट, यहाँ तक कि शिकायत से भी भरी रहती थीं, अब जैसे बर्फ की एक चादर बन चुकी थीं—उसमें सेड्रिक का चेहरा साफ झलक रहा था, जो अब गुस्से से हल्का-सा टेढ़ा हो गया था।

कैटनिस ने उसकी आग-सी निगाहों का सामना बिना पलक झपकाए किया, न पीछे हटी, न झुकी।

दिल का दर्द कब का सुन्न प...

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