अध्याय 204

ज़ेफ़िर के ये शब्द गिरते ही दफ़्तर में अचानक सन्नाटा छा गया।

कैटनिस का चेहरा जम-सा गया। उसे लगा जैसे उसने गलत सुना हो या ज़ेफ़िर की बात का मतलब ठीक से समझ न पाई हो।

“इस्तीफ़ा?” उसने दोहराया—आवाज़ में साफ़ हैरानी थी, और उसका शरीर अनायास ही सीधा हो गया। “क्यों? क्या काम में कोई दिक्कत आ रही है, या…”...

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