अध्याय 219

आईसीयू के कमरे में।

सेड्रिक की आँखें खुली थीं, मगर नज़र कुछ धुँधली-सी थी—छत के एक बिंदु पर टिककर भी जैसे भटक रही हो।

बेहोशी की दवा और भीषण चोट के बाद का असर उसके विचारों को ऐसा बना रहा था मानो वे गंदले पानी की तह में डूबे हों—धीमे, भारी।

उसे पूरे शरीर में तेज़ दर्द महसूस हो रहा था और चारों तरफ़ ...

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