अध्याय 270

कैटनिस ने मना नहीं किया। वह अपने आप आगे-आगे चल पड़ी, अपने ही साए पर पैर रखती हुई—जैसे कोई बच्चा खेल-खेल में करता है।

वे दोनों दोपहर की गलियों में कंधे से कंधा मिलाकर टहलते रहे। ऊपर चिनार के पत्तों से छनकर आती धूप फुटपाथ पर चितकबरे-से पैटर्न बिखेर रही थी।

सड़क लगभग खाली थी—बस कभी-कभार कोई साइकिल घं...

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