अध्याय 39

कैटनिस कुछ पल के लिए ठिठकी, नज़रें उठाकर देखा—वही जाना-पहचाना लिंकन थोड़ी ही दूर खड़ी थी।

“मिस्टर यॉर्क, एक बात होती है—‘पहले आओ, पहले पाओ’,” गिडियन ने आखिरकार बोल ही दिया। मुस्कान उसके होंठों तक सीमित थी, आँखों तक नहीं पहुँची। “साफ़ कहूँ तो, मैं इतनी देर से जान-बूझकर आया हूँ, ताकि उसे घर छोड़ने का...

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