अध्याय 43

कैटनिस उनकी सूक्ष्म-सी ताक़त की खींचतान सुनती रही, भीतर बस थकान और चूर-चूर हो चुकी बेबसी थी।

“बस बहुत हुआ!” उसने सेड्रिक को घूरकर देखा और दोनों की बात काट दी। “अगर बहस करनी है तो बाहर जाकर करो! ये अस्पताल का कमरा है, और मुझे आराम चाहिए!”

उसके शब्द हवा में ठहर गए। सेड्रिक ने हल्का-सा सिर हिलाया, हो...

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