अध्याय 55

कैटनिस हड़बड़ाई हुई हालत में विला से बाहर भागी, जाते-जाते अपना पर्स भी झपट लिया। भव्य मुख्य द्वार से कदम रखते ही उसके चेहरे पर हैरानी का जड़-सा नक़ाब चढ़ गया।

बाहर की धूप उसकी त्वचा पर चुभती लगी, फिर भी उसके भीतर उठ रही हड्डियों तक जमाने वाली ठंड को ज़रा भी गर्माहट नहीं दे पाई।

अमारा की रोती हुई फ...

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