अध्याय 84

होटल के कमरे में पतले, हल्के परदों से छनकर धूप अंदर आ रही थी। कटनिस की नींद खुली तो वह अनजान-सी छत को देखते हुए कुछ पल के लिए चकरा गई, जैसे जगह पहचानने में देर लग रही हो।

कल की थकान और निराशा अब भी मन में अटकी हुई थीं, लेकिन कम-से-कम उस माहौल से दूर होकर साँस लेना भी कुछ आसान लग रहा था।

रूम सर्विस...

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