अध्याय 2
वायलेट की नज़र से:
“मैं मज़ाक नहीं कर रही, डेमन,” मैंने कहा। मेरी आवाज़ शांत थी, लेकिन वह सन्नाटे को चीरती चली गई। “पाँच साल बहुत होते हैं। तुम मुझे कभी प्यार नहीं करोगे। चलो, दिखावा करना बंद करें। एक-दूसरे को बाहर निकलने का रास्ता दे देते हैं।”
मैंने उसकी तरफ देखा। दिल तेज़ धड़क रहा था। यह डर नहीं था—यह दृढ़ता थी।
मुझे भविष्य पता था। मुझे सब कुछ तय-सा मालूम था। दो हफ्ते बाद यूनिवर्सिटी में बड़ा जश्न होगा। डेमन वहाँ जाएगा। वह सेलेस्ट मॉरिसन से मिलेगा। वह उसकी मासूम नीली आँखों में देखेगा, और मेरी दुनिया जलकर राख हो जाएगी।
मैं ऐसा नहीं होने दे सकती थी।
अगर मैं अभी चली गई, तो मैं उसकी दुश्मन नहीं बनूँगी। मैं बस उसकी पूर्व-बीवी रह जाऊँगी। मेरे माता-पिता ज़िंदा रहेंगे। वाइल्डफायर पैक बच जाएगा।
डेमन ने टाइप करना रोक दिया। उसने लैपटॉप बंद किया। आवाज़ इतनी तेज़ थी जैसे गोली चल गई हो।
वह धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
“बाहर निकलने का रास्ता?” वह तिरस्कार से हँसा। वह मेज़ के चारों तरफ घूमकर आया। वह मेरे ऊपर छा गया। “तुमने बुज़ुर्गों को इस्तेमाल करके मुझ पर दबाव डलवाया। तुमने इस गठबंधन के लिए गिड़गिड़ाया। अब तुम लूना के सिंहासन पर बैठी हो। और अब तुम्हें नखरे दिखाने हैं?”
“यह कोई खेल नहीं है,” मैंने कहा। मैंने खुद को मजबूर किया कि उसकी लाल आँखों में देखूँ। “यह शादी खोखली है। इसका कोई मतलब नहीं।”
वह बिजली की तरह हिला। एक पल में वह मेरे सामने था।
उसने मुझे कुर्सी में जकड़ लिया। उसके हाथ आर्मरेस्ट को कसकर पकड़े थे। उसकी गंध मेरी साँसों में भर गई।
“बस यही बात है?” उसकी आवाज़ धीमी गुर्राहट थी। वह मेरे सीने में काँपती-सी उतर गई। उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। उसकी नज़र अपमान से भरी थी। “क्या तुम अकेली हो, वायलेट? क्या तुम्हारा बिस्तर बहुत ठंडा है? क्या तुम इसलिए तमाशा कर रही हो क्योंकि तुम्हें किसी मर्द का स्पर्श चाहिए?”
पाँच साल में उसने मुझे कभी छुआ तक नहीं था।
मेरे गले में कड़वाहट-सी उभर आई।
“मत करो,” मैं झल्लाई। मैंने उसे धक्का दिया और खड़ी हो गई। मेरे हाथ गुस्से से काँप रहे थे। “मुझे अपमानित करने की कोशिश मत करो।”
मैं एक कदम पीछे हटी। हमारे बीच दूरी बना ली।
“सोचो, डेमन। फ्रॉस्ट पैक ताकतवर है। अब तुम्हें मेरे परिवार की ज़रूरत नहीं। मेरी कीमत खत्म हो चुकी है। तुम्हें एक सच्चा मेट चाहिए।”
एक सेकंड के लिए उसका नकाब सरक गया। व्यंग्य गायब हो गया। वह ठंडा लग रहा था। उलझा हुआ। उसने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं कोई अजनबी हूँ।
फिर उसकी दीवारें वापस खड़ी हो गईं।
“यह बकवास बंद करो,” वह मुड़ा। उसने मेज़ से अपनी कार की चाबियाँ उठाईं। “मुझे असली समस्याएँ सुलझानी हैं।”
वह दरवाज़ा पटकता हुआ बाहर निकल गया।
कुछ ही सेकंड बाद, उसके इंजन की दहाड़ सुनाई दी।
घर खाली था। मैं ऊपर चली गई।
मैं मास्टर बेडरूम में नहीं गई। मैं गेस्ट रूम में गई। तीन साल से मैं वहीं सोती आ रही थी।
मैंने रेशमी ड्रेस उतारी। डेमन ने उसे देखा तक नहीं था। वह फर्श पर गिर पड़ी—महंगे कपड़े का बस एक ढेर। उस परफेक्ट गुड़िया की निशानी, जो मैं बनने की कोशिश करती रही।
मैंने अलमारी खोली। पीछे तक हाथ डाला। एक पुराना, धूल से सना डफ़ल बैग मिल गया।
उसके अंदर मेरे पुराने कपड़े थे—काली कार्गो पैंट, सादी सफेद टी-शर्ट, और भारी कॉम्बैट बूट।
मैंने उन्हें पहन लिया। यह कवच जैसा लगा। मुझे उस लड़की की परछाईं महसूस हुई जो मैं कभी थी। मैं अल्फा की बेटी थी। मैं जंगल में बेखौफ दौड़ा करती थी। वह लड़की जाग रही थी।
मैं गैरेज में गई। वह बहुत बड़ा था। डेमन की लग्ज़री कारों से भरा हुआ—फेरारी, बेंटली।
मैं उनके पास से निकलती चली गई। सबसे दूर कोने में, परछाइयों के बीच, मोटा कैनवास का तिरपाल किसी चीज़ को ढके हुए था।
मैंने कवर खींचकर उतार दिया। धूल रोशनी में नाचने लगी।
वहाँ मेरी कस्टम BMW S1000RR खड़ी थी। चमकदार काली, और उस पर लाल धारियाँ—जैसे पंजों के निशान। वह तेज़ लग रही थी। खतरनाक लग रही थी। यह लूना के लिए बनी बाइक नहीं थी।
मैंने फ्यूल टैंक पर हाथ रखा। धातु ठंडी थी।
मैंने हैंडल पकड़े। किकस्टैंड से उसे उठाने की कोशिश की।
मेरे घुटने जवाब दे गए।
बाइक भारी थी—मुझे जितनी याद थी, उससे भी ज्यादा। मेरी बाँहें काँप गईं। बरसों के तनाव और उदासी ने मेरी मांसपेशियों को कमजोर कर दिया था। मेरी साँस अटक गई। मैंने दाँत भींचे। बड़ी मुश्किल से बाइक को अपने ऊपर गिरने से रोका।
कमज़ोर, मैंने सोचा। मुझे शर्म आई। उसने मुझे कमज़ोर बना दिया।
नहीं। मैंने खुद को कमज़ोर होने दिया।
“एम्बर,” मैंने फुसफुसाकर कहा। मैंने अपनी भेड़िया आत्मा को पुकारा। “मेरी मदद करो।”
जवाब में सन्नाटा था।
अंदर बहुत गहराई में—कुछ भी नहीं। न कोई हलचल, न कोई गर्माहट। एम्बर ने जवाब नहीं दिया। वह बहुत लंबे समय से दबाई गई थी। डेमन के अल्फा कमांड के बोझ ने उसे घोंटकर गहरी नींद में धकेल दिया था।
मैं बिल्कुल अकेली थी।
मैंने दाँत भींच लिए। जादू की जगह गुस्सा आ गया। मैं कमज़ोर होने से इनकार करती थी। आज रात नहीं।
मैंने कराहते हुए पूरी ताक़त लगा दी। मेरी मांसपेशियाँ चीख उठीं। मैंने बस ज़िद्दी, खालिस गुस्से के दम पर खींचा। धीरे-धीरे, इंच दर इंच, बाइक उठती गई। मैंने सीट के ऊपर से पैर घुमाकर बैठ गई। चाबी घुमाई।
ब्रूपब में शोर था। हवा में बीयर और शिफ्टरों के फेरोमोन की तीखी-सी गंध थी।
पीछे की तरफ़ एक बूथ में मुझे मेरे दोस्त दिख गए।
सिएना वॉल्श अपनी सीट पर ही थिरक रही थी। उसके गहरे घुँघराले बाल उछल रहे थे। जेड रिवर्स एकदम सीधे बैठी थी। उसकी नज़रें कमरे को ऐसे छान रही थीं जैसे कोई सिपाही। वो मेरी पुरानी पैक की गामा थी। लिली प्राइस नोटबुक में कुछ लिख रही थी। उसके सामने वाइन का ग्लास था।
मैं टेबल तक पहुँची। हेल्मेट हाथ में था। बातें रुक गईं। वो मुझे ऐसे घूरने लगे जैसे मैंने भूत का रूप ले लिया हो।
“वाइ?” जेड ने पूछा। उसकी आँखें फैल गईं। “तू… तू सच में आ गई। तू तो कभी बाहर नहीं निकलती।”
“मैं आ गई,” मैंने कहा। मैं सिएना के बगल में बूथ में खिसक गई। मैंने व्हिस्की मँगवाई। बिना बर्फ के।
“क्या हुआ?” लिली ने नरमी से पूछा। उसने नोटबुक बंद कर दी। “क्या ये डेमन है? क्या वो फिर से सालगिरह भूल गया?”
मैंने ग्लास उठाया। एक ही घूँट में आधी पी गई। जलन-सी हुई। मैंने ग्लास टेबल पर पटक दिया।
“मैं उसे छोड़ रही हूँ,” मैंने कहा। “मैं ये बंधन तोड़ रही हूँ।”
तीन सेकंड तक सन्नाटा रहा। फिर वे फट पड़े।
सिएना चीख पड़ी। उसने दोनों हाथ हवा में उछाल दिए। “आख़िरकार! ओह माय गॉडेस, आख़िरकार!”
जेड ने सीटी बजाई। उसने मेरी पीठ थपथपाई। “अब जाकर अक़्ल आई, वायलेट। मैं तो खुद जाकर उससे लड़ने वाली थी।”
“क्या तू पक्की है?” लिली ने पूछा। उसकी आँखें भीगी थीं। “तू उससे इतना प्यार करती थी।”
“मैंने एक कल्पना से प्यार किया था,” मैंने कहा। शराब ने मेरे सीने को गर्म कर दिया था। “वो कल्पना मर चुकी है। मुझे अपनी ज़िंदगी वापस चाहिए।”
हमने पी। हम हँसे। बरसों बाद पहली बार मुझे लगा जैसे मेरे कंधों से बोझ उतर गया हो। मैं न निराश पत्नी थी, न नाकाम लूना। मैं बस वायलेट थी।
रात बढ़ती गई। शराब से नज़र धुंधली होने लगी।
सिएना टेबल पर झुक आई। उसका चेहरा लाल था। उसने बार की तरफ़ उँगली कर दी।
“चलो, मिस सिंगल लेडी,” वो लड़खड़ाती आवाज़ में बोली। “डेमन तो मज़े करेगा। तू भी कर। देख उधर। तीन बजे की दिशा में। क्या स्वाद है।”
मैंने आँखें मिचमिचाईं।
बार के पास एक लंबा-सा जवान लड़का खड़ा था। चौड़े कंधे। बिखरे भूरे बाल। यूनिवर्सिटी की हुडी पहने हुए। वो कम उम्र लग रहा था। खुश लग रहा था। सीधा-सादा लग रहा था।
मेरे दिमाग में एक पागल-सा ख़याल आया। क्यों नहीं? डेमन किसी स्टूडेंट पर फिसलने वाला है, तो मैं क्यों न किसी को ढूँढ लूँ?
“देखती रहो,” मैंने बड़बड़ाया।
मैं बूथ से निकल आई। फर्श ज़रा-सा तिरछा लगा। मैंने खुद को संभाला।
मैं उसके पास गई। वो वाक़ई लंबा था। मैंने हाथ बढ़ाया। उसके कंधे पर हथेली रख दी।
वो मुड़ा।
उसकी आँखें दयालु-सी धूसर थीं। चेहरा अच्छा था। किसी शरीफ़ लड़के जैसा लग रहा था।
“हाय,” मैंने कहा। मैंने मुस्कुराने की कोशिश की। “तुम्हें शायद किसी साथ की ज़रूरत है।”
लड़के ने पलकें झपकाईं। वो चौंका। शरमा गया। एक कदम पीछे हुआ। बड़ी नरमी से उसने मेरे हाथ को अपने कंधे से हटा दिया।
“अ… सॉरी, मैम,” उसने कहा। आवाज़ शालीन थी। “मेरी गर्लफ़्रेंड है। मैं तो बस टेकआउट का इंतज़ार कर रहा हूँ।”
इंकार भी कितना शालीन था। ठीक-ठाक। मुझे लगभग हँसी आ गई।
“ठीक,” मैं बुदबुदाई। “मेरी गलती। सॉरी।”
मैं मुड़कर जाने लगी। तभी कमरा घूम गया।
व्हिस्की एक साथ सिर पर चढ़ गई। सब कुछ डोलने लगा।
मेरे बूट की एड़ी कुर्सी के पाए में अटक गई। मैं आगे की तरफ़ गिर पड़ी।
मैंने आँखें भींच लीं। कड़े फर्श की चोट का इंतज़ार किया। लेकिन दर्द आया ही नहीं।
मज़बूत हाथों ने मेरी बाँहें पकड़ लीं। उन्होंने मुझे आसानी से ऊपर खींच लिया।
मैंने पलकें झपकाईं, दिमाग का धुँधलका हटाने की कोशिश की। ये तो वही स्टूडेंट होना चाहिए था।
“थैंक्स,” मैं लड़खड़ाई। मुझे अपना शरीर भारी लग रहा था। “मैं बस… थोड़ा चक्कर खा रही हूँ।”
मैंने सिर ऊपर उठाकर उसे देखने की ज़ोर लगाया। मैं मुस्कुराना चाहती थी।
लेकिन बार की रोशनी फैलकर लकीरों में घुल गई। परछाइयाँ पंजों की तरह लंबी खिंचने लगीं।
लड़के का चेहरा पानी की सतह की तरह लहराने लगा। वो दयालु मुस्कान गायब हो गई। वो मुलायम धूसर आँखें गहरी हो गईं। उनमें चमक उभर आई।
किरमिज़ी। खून-सी लाल।
चेहरा तेज़, सख़्त होने लगा। ठंडा। निर्दयी।
क्या वो सच में यहाँ था? या शराब मेरे साथ खेल कर रही थी?
