अध्याय 45

वायलेट की नज़र से (POV):

मेरी उँगलियाँ फोन के चारों ओर कस गईं। जैकेट पर लगे गद्देदार आर्म-पैड पर बैठा शैडो हिला, मेरी देह से उठती तनावट भाँपकर चोंच चटकाने लगा। “तुम पूछ क्यों रहे हो? मैंने हमारी किसी भी तय बात को नहीं तोड़ा,” मैंने कहा—अपनी आवाज़ की धार छिपा नहीं पाई।

फिर एक ठहराव। इस बार ज़्य...

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