अध्याय 9
वायलेट की नज़र से:
द मिडनाइट हाउल का भारी बेस मेरी पसलियों से टकरा रहा था, जब मैं वीआईपी सेक्शन को चीरती हुई आगे बढ़ी।
मैं निजी बूथों वाले मोड़ पर पहुँची और ठिठक गई। अभी हाथापाई शुरू नहीं हुई थी, लेकिन हवा घुटनभरी थी। सिएना पैर जमाए खड़ी थी, और उसकी आँखों में उसके भेड़िए की एंबर-सी चमक झिलमिला रही थी।
लूसियन क्रॉस ने मुझे देखा और मुझे रोकने के लिए हड़बड़ाकर एक टेबल फाँद डाली।
“लूना! देवी का शुक्र है,” लूसियन हकलाया, दोनों हाथ शांत कराने के इशारे में उठाते हुए।
लूना? पहली बार उसने मुझे इस नाम से पुकारा था। आमतौर पर डेमन के दोस्त भी उसी की तरह मुझे नापसंद करते थे—जैसे मैं कोई अदृश्य झंझट हूँ या चलती-फिरती मज़ाक।
“ये गलतफहमी है! वो लड़कियाँ… मैंने बुलाया था! मेरे लिए! डेमन का इससे कोई लेना-देना नहीं!”
सिएना झपटकर आगे बढ़ी, लूसियन का कॉलर पकड़ा और उसे पीछे ढकेल दिया।
“बकवास!” वह गरजी, उसकी नाक के सामने उँगली तानते हुए। “क्या मैं अंधी हूँ? वो गोरी तो लगभग उसकी पैंट में हाथ डाले बैठी थी, और उसे व्हिस्की पिला रही थी! इसे तुम तुम्हारा साथ देना कहते हो?”
लूसियन सिकुड़ गया, सिएना के गुस्से से बुरी तरह डरा हुआ। उसने गिड़गिड़ाती आँखों से मेरी तरफ देखा, मानो मुझसे कह रहा हो कि अपनी दोस्त को लगाम दो।
मैं आगे बढ़ी और सिएना की कलाई पकड़ ली। “बस, सिएना।”
मैंने उसे पीछे खींच लिया। “लूसियन बस अपना काम कर रहा है। वो एक अच्छा पहरेदार कुत्ता है। और वैसे भी, अगर डेमन नहीं चाहता कि वे वहाँ हों, तो वे वहाँ होती ही नहीं। उसके पास कोई तब तक नहीं आ सकता, जब तक वो खुद इजाज़त न दे।”
सिएना मुझे देखती रह गई, मेरी बेरुख़ी से स्तब्ध। मैं मुड़ी और जाने लगी—ड्रामे से पहले ही थक चुकी थी।
“रुको, लूना…” लूसियन ने पुकारा, घबराकर उस छायादार बूथ की ओर देखते हुए। “क्या तुम… क्या तुम नाराज़ हो? डेमन, उसे बताओ कि वो—”
बूथ के अँधेरे में कोई हिला। डेमन खड़ा नहीं हुआ। उसने अपने गिलास में एंबर रंग की शराब को हल्का-सा घुमाया, और उसकी सुर्ख आँखें ऊब और क्रूरता के मिले-जुले भाव के साथ मुझ पर टिक गईं।
“लूना?” उसकी गहरी आवाज़ शोर को चीरती हुई आई। “कौन? वो? क्या वो इसके लायक है?”
मेरे कदम लड़खड़ा गए। सीने में एक तेज़, बिजली-सी चुभन दौड़ गई।
मैंने दर्द निगल लिया और ज़बरदस्ती एक ठंडी मुस्कान ओढ़ ली।
नहीं, डेमन। मैं इसके लायक नहीं। वो मनहूस ख़िताब सेलैस्ट के लिए ही बचाकर रखो।
मैंने एक शब्द नहीं कहा। बस पीठ मोड़ी और चल पड़ी।
हम नीचे वाले स्तर पर एक बूथ में जा बैठे, वीआईपी डेक की दमघोंटू ‘ख़ास-ख़ास’ वाली हवा से दूर। यहाँ संगीत ज़्यादा तेज़ था, लेकिन हवा ज़्यादा साफ़ लग रही थी।
“वायलेट,” जेड ने अपने ड्रिंक के ऊपर से मुझे घूरते हुए पूछा, “क्या तुम पक्की हो? वहाँ… तुमने पलक तक नहीं झपकाई। क्या तुम सच में सब खत्म कर चुकी हो?”
“हाँ, खत्म।” मैंने घूँट लिया, जलन का स्वाद जैसे अच्छा लग रहा हो। “दस साल तक मेरी दुनिया उसके मूड के आसपास घूमती रही। वो भौंह चढ़ाता तो मैं घबरा जाती। वो मुस्कुराता तो मैं आसमान पर पहुँच जाती। मगर आज रात?” मैंने फिर एक घूँट लिया। “आज मुझे बस एक घमंडी आदमी दिखा, बदमिज़ाज। मैं उससे नफ़रत नहीं करती। मैं बस… परवाह नहीं करती। जैसे बैटरी आखिरकार मर गई हो।”
सिएना ने खुशी में चीख-सी निकाली और अपना शॉट ग्लास ऊँचा कर दिया। “बैटरी की मौत के नाम! और ये कभी दोबारा चार्ज न हो!”
हमने उसी के नाम जाम टकराए, शराब डेमन की आवाज़ की बची-खुची ठंडक को जला कर मिटाती गई। हम हँसे, पीते रहे—और हर राउंड के साथ मेरे कंधों का बोझ हल्का होता गया।
अचानक, लिली का फोन टेबल पर ज़ोर से भनभना उठा। उसने स्क्रीन देखी, और उसका चेहरा हल्का गुलाबी पड़ गया। “कॉनर है। पूछ रहा है मैं कब वापस आ रही हूँ।”
सिएना ने आँखें घुमाईं और झुककर लिली की बाँह में कुहनी मार दी। “अपने उस डेल्टा से कहो ज़रा शांत रहे। उसे तुम्हारी सुरक्षा की चिंता नहीं है; उसे चिंता है कि उसकी पसंदीदा ‘सवारी’ उसके बिना शहर में घूम रही है।”
लिली का चेहरा टमाटर-सा लाल हो गया। “सिएना!”
“क्या?” सिएना मुस्कुराई, मुझे देखकर आँख मारी। “शर्त लगा लो, वो अभी घर पर बैठा घड़ी घूर रहा होगा, बस इंतज़ार में कि उसकी ‘तलवार’ चमकाई जाए। उससे कहो अगले बीस मिनट तक उसे अपनी पैंट में ही रखे—या उसे पकड़ने के लिए तुम्हें अभी ही आना पड़ेगा?”
“हे भगवान, मैं जा रही हूँ!” लिली चींकी, अपना पर्स उठाया और लगभग भागती हुई बाहर निकल गई—और हम सब हँसी से लोटपोट हो गए।
मैं वापस उसी जगह जाने लगी जहाँ मैं बिल्कुल नहीं जाना चाहती थी: ब्लैकवुड एस्टेट।
घर में सन्नाटा था। मैंने प्रवेश-हॉल में जूते उतारे और रसोई की तरफ बढ़ी, लेकिन पीछे के आँगन से पानी के छपाछप की आवाज़ ने मुझे रोक दिया।
मैं काँच के दरवाज़ों तक गई। डेमन पूल से बाहर निकल रहा था।
कमर से ऊपर वह नंगा था। चाँदनी उसकी मांसपेशियों की सख़्त रेखाएँ उभार रही थी, और पानी उसके सीने पर तेल की तरह बह रहा था।
उसने मुझे पल भर में भाँप लिया। मैं पीछे हटती, उससे पहले ही दरवाज़ा सरककर खुल गया। डेमन रास्ता रोककर खड़ा हो गया—मेरे ऊपर छाया हुआ।
फिर उसका हाथ मेरी गर्दन के पीछे, बालों की जड़ में उलझा और उसने मेरा सिर पीछे की तरफ़ झुका दिया।
उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर कुचल दिए।
वो प्यार भरी चुम्बन नहीं थी। वो सज़ा थी। अधिकार जताना था। मेरा शरीर उसी पल मेरे खिलाफ़ हो गया। ‘मेट बॉन्ड’ मेरे पूरे वजूद में दौड़ गया, मेरी समझ पर हावी।
क्यों नहीं? मैंने सोचा। हम मेट हैं। अगर मैं उसका दिल नहीं पा सकती, तो उसके शरीर का तो इस्तेमाल कर ही सकती हूँ।
मैं अनजाने में उसकी तरफ़ झुकने लगी, मेरा विरोध पिघलता गया। जैसे ही मैंने उसे छूने के लिए हाथ उठाया, उसने खुद को झटके से अलग कर लिया।
मैं हाँफ उठी, गड़बड़ा गई। डेमन तीन फ़ीट दूर खड़ा था, उसके चेहरे पर तिरछी हँसी मरोड़ खा रही थी। उसकी आँखों की गर्मी जमकर बर्फ़ बन चुकी थी।
“दयनीय,” उसने थूक की तरह शब्द उछाला। “मुझे पता था, ये सब ढोंग है। ज़रा-सी तवज्जो मिली नहीं कि पिघल गई। सच में सोचा था कि नखरे दिखाने से मुझ पर असर होगा?”
शर्म पहले लगी—गरम, चुभती हुई। और फिर उसके पीछे-पीछे ग़ुस्सा आया।
मैंने अपने कपड़े ठीक किए और उसकी आँखों में सीधे देखा।
“मैं कोई खेल नहीं खेल रही थी, डेमन। और मैं तुम्हारे लिए नहीं पिघल रही थी। तुम वहम में हो।”
वो उपहास से हँसा, तौलिया उठाते हुए। “भाषण बचा कर रखो।”
“नहीं, तुम सुनो।” मैं एक क़दम उसकी तरफ़ बढ़ी। “तुम जानते हो, तुम किस जैसे लग रहे हो? एक ऐसे कुत्ते जैसे, जिसे उसके मालिक ने खाना देना बंद कर दिया हो। तुम मेरी पूजा के इतने आदी हो कि जैसे ही मैं उसे वापस खींचती हूँ, तुम सूँघते हुए चले आते हो—अपनी औकात पक्की करने। तुमने मुझे नहीं, खुद को तसल्ली देने के लिए चूमा।”
डेमन जड़ हो गया। उसकी पीठ की मांसपेशियाँ कसकर उभर आईं। वो धीरे-धीरे मुड़ा, उसकी आँखें ख़तरनाक गहरे लाल रंग से चमक उठीं।
“संभलकर, वायलेट,” उसने चेताया, आवाज़ भारी और नीची।
“मेरी जगह बिस्तर पर है,” मैंने ठंडे स्वर में कहा। “अकेले। अपनी तैराकी का मज़ा लो।”
मैं मुड़कर चली गई। कुछ ही मिनट बाद उसकी स्पोर्ट्स कार की दहाड़ ने सन्नाटे को चीर दिया, और वो रात में तेज़ी से निकल गया।
मैं अपने कमरे में गई, और दरवाज़ा एक ठोस-सी क्लिक के साथ लॉक कर दिया। मेरा शरीर अब भी अधूरी झुंझलाहट से गूँज रहा था।
मैंने हाथ नीचे सरकाया और उस टीस का इलाज खुद कर लिया। जल्दी, साफ़, बिना किसी झंझट के। अँधेरे में लेटी, साँसें समेटती हुई, मैं खीजकर सोच रही थी कि ये आदमी इन दिनों घर पर इतना क्यों रहने लगा है।
पर कम-से-कम मैं अपने दम पर थी। “मदद” ढूँढ़ने के लिए उसकी तरह शहर छानने की ज़रूरत मुझे नहीं थी।
अगली सुबह, मैंने अपनी अलमारी से गहरे लाल रेशम की एक स्लिप निकाली। वो टाइट थी, उग्र-सी, और उसका गला ख़तरनाक हद तक नीचे उतरता था।
मैंने बड़ी नाप-तोलकर मेकअप किया—तेज़ आईलाइनर और गहरी लाल लिपस्टिक।
एक घंटे बाद मैं अस्पताल पहुँची। मैं सीधे ज़ेन कार्टर के कमरे में गई।
ज़ेन बिस्तर पर सीधा बैठा था, चेहरा सेहत की लालिमा से दमक रहा था—चलने के लिए तैयार बैठे किसी उतावले पिल्ले जैसा। मुझे देखते ही वो जैसे खुशी से काँप उठा।
“लूना!” वो खिल उठा, लड़कों वाली चमकीली मुस्कान के साथ। “मैं बहुत खुश हूँ कि तुम आईं! डॉक्टर कह रहा है मेरा हीलिंग फैक्टर रिकॉर्ड तोड़ रहा है। शायद कल ही डिस्चार्ज हो जाऊँ!”
“अच्छा?” मैंने पूछा, होंठों पर धीरे-धीरे मुस्कान फैलने दी।
“हाँ! सच में, मैं तो बहुत बढ़िया महसूस कर रहा हूँ। अभी चाहूँ तो एक चक्कर दौड़ भी लगा लूँ।” वो अपने पैर बिस्तर के किनारे से नीचे लटकाने लगा, साबित करने को तैयार।
“इतनी जल्दी नहीं, शेर।”
मैं आगे बढ़ी और उसकी छाती पर हथेली सपाट रख दी।
“तुम्हें ठीक लग रहा होगा,” मैंने धीमे, रेशमी स्वर में कहा, “लेकिन तुम खुद को अच्छे-खासे उलझा बैठे हो।”
मैंने आईवी की लाइन और मॉनिटर की तारों की तरफ़ इशारा किया, जो उसकी उतावली में गड़बड़ा गई थीं।
“मैं ठीक कर देती हूँ।”
मैं उसके और करीब गई और दूसरी तरफ़ की उलझी तार तक पहुँचने के लिए उसके ऊपर से झुक गई।
उस हालत में मेरा शरीर उसके चेहरे से बस इंचों दूर था। गहरा नेकलाइन मेरी छाती को पूरी तरह सामने ले आया था—उसकी नज़रों के पूरे दायरे पर जैसे कब्ज़ा।
मैंने जानबूझकर धीरे-धीरे तारें सुलझाईं। मैं सुन सकती थी दिल की मशीन की रफ़्तार बढ़ रही थी—बीप... बीप... बीप-बीप-बीप—और वो उसे पूरी तरह बेनकाब कर रही थी।
“लो,” मैंने फुसफुसाया, सिर मोड़ते हुए ताकि मेरे होंठ उसके कान को छूते-छूते रह जाएँ।
“मैं... उह... थैंक्स,” उसने हकलाकर कहा, उसकी आँखें घबराकर एक तरफ़ भागीं।
मैं धीरे से पीछे हटी, होंठों पर शरारती मुस्कान। लेकिन जैसे ही मैं सीधी हुई, मेरी नज़र दरवाज़े पर हुई।
मैं ठिठक गई।
दरवाज़े की चौखट से टिककर खड़ा था—इवान थॉर्न।
उसकी हरी आँखें कुछ नहीं बता रही थीं। उसने ज़ेन के सुर्ख चेहरे से मेरी खुली नेकलाइन तक देखा, और फिर मेरी आँखों पर आकर रुक गया।
