अध्याय 151 तुम के बगल में आदमी से दूर रहो

लिलियन का नाम सुनते ही एस्ट्रिड का दिल अचानक खुशी से उछल पड़ा। वह बार-बार सिर हिलाने लगी, और काँपती आवाज़ में फुसफुसाई, “हाँ… हाँ, मैं ही हूँ। आप मेरी माँ को जानते थे?”

लिलियन से फिर मिलने का ख़याल आते ही एस्ट्रिड के भीतर रोमांच की लहर दौड़ गई। बोलते-बोलते वह बूढ़े आदमी की तरफ़ बढ़ी।

बूढ़ा आदमी, अ...

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