अध्याय 67 दूरी

चिकनी, आबसीडियन-सी काली गाड़ी शिकारी-सी फुर्ती के साथ शहर की भीड़भाड़ भरी सड़कों की पेचीदा रगों में से सरकती चली जा रही थी। उसकी पॉलिश की हुई सतह पर महानगर के रंग-बिरंगे नीयॉन बोर्डों की झिलमिलाहट कलाइডोस्कोप की तरह टूटकर चमक रही थी। एस्ट्रिड खिड़की से बाहर देख रही थी—वही जाना-पहचाना, धुँधलाता हुआ द...

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