अध्याय 104

समर की नज़र से

मैं सिम्फ़नी हॉल की सीढ़ियों पर जड़-सी खड़ी रह गई, उसी जगह घूरते हुए जहाँ मुझे लगा था कि मैंने उसे देखा है। सड़क का कोना अब खाली था—बस भीगी हुई सड़क, जिस पर धूसर दोपहर की रोशनी झिलमिला रही थी, और कुछ अनजान लोग छाते लिए जल्दी-जल्दी आगे बढ़ रहे थे। मेरा दिल पसलियों से इस कदर धड़क र...

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