अध्याय 158

समर की नज़र से

किरन की आवाज़ ऊँची नहीं थी। ज़रूरत भी नहीं थी। उस सपाट, बर्फ़ीले लहजे में कुछ ऐसा था कि ड्रेक ने पलटकर देख लिया।

एक पल के लिए वे बस एक-दूसरे को देखते रहे। बाप और बेटा। वह आदमी जिसने उसे तोड़ दिया था, और वह लड़का जो उस सबके बाद भी बच गया था।

फिर ड्रेक मुस्कराया। “लो, आ गया मेरा ...

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