अध्याय 183

समर की POV

मैं सुबह उठी तो मेरे बेडरूम की खिड़की से धूप सीधे अंदर आ रही थी—ऐसी साफ़, चमकीली सुबह, जिसमें लगता है कि आज कुछ भी मुमकिन है। नाइटस्टैंड पर रखा मेरा फोन भिनभिनाया—शायद मिया का रोज़ वाला ‘गुड मॉर्निंग’ मैसेज, साथ में कोई बेवकूफ़-सा मीम भी। मैं अब भी आधी नींद में थी, फोन की तरफ हाथ बढ़...

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