अध्याय 23

समर की नज़र से

ये शब्द मुझे ऐसा लगे जैसे किसी ने थप्पड़ मार दिया हो।

मेरे बगल में मिया के मुँह से गुस्से में एक छोटी-सी आवाज़ निकली, मगर मैं उसकी तरफ देख नहीं पाई। मैं इवान के चेहरे से नज़र नहीं हटा पाई—उसकी आँखों में ज़रा भी समझ नहीं थी, बस ये सच्चा-सा यक़ीन कि उसने मेरे ऊपर कोई एहसान कर दिया...

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