अध्याय 24

किरन की नज़र से

मैं फिज़िक्स लैब तक आधा रास्ता ही पहुँचा था कि पीछे से उसने मेरा नाम पुकारा।

“किरन। किरन, रुको—प्लीज़।”

मैं नहीं रुका। रुक नहीं सकता था।

“किरन।” अब और पास। वो दौड़ रही थी।

मैं सीढ़ियों वाले दरवाज़े पर जाकर ठिठक गया। पीछे मुड़कर नहीं देखा। “क्या।”

वो मेरे ठीक पीछे फिसलती-सी ...

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