अध्याय 29

समर की नज़र से

कीरन ने मुझे देखते ही जैसे कदमों की ज़ंजीर टूटकर रुक गई। उसकी आँखें फैल गईं। हम दोनों एक जमी हुई-सी घड़ी भर एक-दूसरे को देखते रह गए—वो दरवाज़े की चौखट पर, और मैं फर्श पर उकड़ूँ बैठी, किसी बेवकूफ की तरह हाथों में टेढ़ा-सा दबा हुआ पॉप-टार्ट्स का डिब्बा पकड़े।

“…तुम कब से बाहर खड़ी...

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