अध्याय 41

समर की नज़र से

मैं एथलेटिक मैदान के किनारे खड़ी थी, क्लिपबोर्ड को सीने से लगाए, लड़कों को उनकी वार्म-अप लैप्स खत्म करते हुए देख रही थी। पतझड़ की धूप चेहरे पर गुनगुनी लग रही थी, मगर मुझे उसका एहसास ही नहीं था। मेरी सारी नज़रें उस धुंधली-सी, पुरानी हुडी वाले लड़के पर टिकी थीं जो सबसे पीछे दौड़ रह...

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