अध्याय 433

काइलन

वैरियस की आँखें मेरी आँखों में धँस गईं। “इसका कोई साफ़ समय तय नहीं है,” उसने कहा। “ये महीनों में हो सकता है… सालों में… दशकों में, लेकिन होगा ज़रूर।”

इस पल के लिए तो ये सब किसी काम का नहीं था।

“इसीलिए तुम्हें ये करना ही होगा,” उसने आगे कहा। “और तुम मुझसे वादा करोगे।” उसकी नज़रें मेरी नज़...

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