अध्याय 434

कायलन

मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?

“नहीं,” मैंने सुधारा, “तुम यहाँ क्या कर रही हो?”

कैलिस अचानक चौंक गई, नाक सिकोड़ ली।

“मैं—”

उसके शब्द गले में ही अटक गए, चेहरा गड़बड़ा गया, जैसे उसे उम्मीद ही नहीं थी कि उससे सवाल पूछा जाएगा। अचानक उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, और उसके होंठों से हल्की सी हाँफ निकल गई...

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