अध्याय 2

"क्या कहा तुमने?"

एलेन की आँखों में घबराहट की एक झलक दौड़ गई; मन ने कहा कि भागकर तुरंत घर पहुँचे।

लेकिन याद आया कि वीरा अभी उसकी बाँहों में थी, तो उसके पास रुकने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

"मैंने तुमसे कहा नहीं था कि उस पर ठीक से नज़र रखना?" उसने सख्ती से पूछा।

नैनी ने अपराध-बोध भरे स्वर में कहा, "जूलियस लगातार एग टार्ट्स माँग रहा था, तो मैं रसोई में उन्हें बेक करने चली गई। लेकिन वापस आई तो वो कहीं नहीं मिला।"

एलेन ने गहरी साँस ली, बड़ी मुश्किल से खुद को शांत रखते हुए बोली, "अभी उसी वक़्त उसे ढूँढ़ो। और लोगों को भी लगा दो। मैं वीरा को तुरंत घर ले जा रही हूँ।"

"जी, मैडम।"

फ़ोन रखते ही एलेन का बदन जैसे एकदम ढीला पड़ गया।

वीरा को लगातार देखभाल चाहिए थी, और जूलियस को ढूँढ़ना भी ज़रूरी था।

लेकिन वो अकेली थी—एक ही समय में दो जगह कैसे होती? सारी ज़िम्मेदारियाँ उसी के कंधों पर थीं।

एलेन को लगा जैसे गरम तवे पर पड़ी चींटी—घबराकर इधर-उधर भागती फिर रही हो।

उसके मन में आर्थर को कॉल करने का ख़याल आया, मगर उठते ही उसने उसे दबा दिया।

आर्थर तो जवाब देगा ही नहीं।

उसकी नज़रों में एमिली हर चीज़ से बढ़कर थी।

एलेन जितनी जल्दी हो सका, वीरा को लेकर घर लौट आई।

असिस्टेंट बैरी विल्सन का अभी-अभी संदेश आया था कि फैमिली डॉक्टर रास्ते में हैं।

एलेन ने सावधानी से वीरा को बिस्तर पर लिटाया और कहा, "वीरा, डॉक्टर अभी आ जाएँगे। मम्मी को अभी तुम्हारे भाई को ढूँढ़ना है।"

बेहोशी-सी हालत में भी वीरा ने ज़ोर लगाकर आँखें खोलीं और बड़बड़ाई, "एमिली..."

एलेन का दिल दर्द से सिकुड़ गया।

इस हालत में भी वीरा एमिली को याद कर रही थी।

"अच्छी बच्ची बनो, वीरा। ठीक हो जाओगी तो उससे मिल लेना।"

वीरा को दिलासा देकर एलेन तुरंत जूलियस को ढूँढ़ने निकल पड़ी।

"जूलियस!"

"जूलियस, कहाँ हो तुम?"

"मम्मी को डराओ मत!"

एलेन ने पूरे फैले हुए बंगले को छान मारा।

हालाँकि उनका घर शहर के बीचोंबीच नहीं था, पर आसपास की सड़कें व्यस्त थीं, हर तरफ़ गाड़ियाँ ही गाड़ियाँ।

अगर जूलियस को कुछ हो गया तो...

एलेन का दिल चिंता से मरोड़ खाने लगा; वो आगे सोच भी नहीं पा रही थी।

"जूलियस!"

वो लगभग पूरा घर उलट-पुलट चुकी थी कि जैसे ही उसने एक कमरे की जाँच पूरी की, उसे बिस्तर के नीचे से किसी इलेक्ट्रॉनिक गेम की धीमी-सी आवाज़ सुनाई दी।

वो झट से उसी दिशा में मुड़ी।

अगर उसे भ्रम नहीं था, तो ये वही स्मार्टवॉच वाला गेम था जो उसने जूलियस के लिए खरीदा था।

एलेन ने बिस्तर के नीचे लटकता पर्दा झटके से हटाया, और सचमुच जूलियस वहीं लेटा था।

उसके भीतर गुस्सा, बेचैनी और राहत—सब एक साथ उमड़ आए कि कुछ अनहोनी नहीं हुई। उसने जूलियस को घूरते हुए आरोप भरे स्वर में कहा, "जूलियस, तुम यहाँ छुपे क्यों हो? तुम्हें पता है मैं तुम्हें ढूँढ़ते हुए कितनी परेशान रही?"

जूलियस ने लापरवाही से मुँह फुलाया। "तुमने मुझे एमिली के पास जाने नहीं दिया।"

एलेन उसे अविश्वास से देखती रह गई। उसकी आँखों में गहरी निराशा भर गई।

वो बहुत कुछ कहना चाहती थी, मगर सारे शब्द गले में अटक गए।

जूलियस का बर्ताव और लहजा उसे ऐसा लगा जैसे कोई चाकू उसके दिल में घुसकर मरोड़ रहा हो। उस ज़ख्म से ठंडी हवा-सी गुजरती महसूस हुई, जो उसे हड्डियों तक जमा दे।

आख़िर ये उसी का खून था!

अचानक एलेन के भीतर बोलने की सारी इच्छा बुझ गई। उसने जूलियस को उलझी हुई नज़र से देखा और बाहर निकल गई।

नीचे, असिस्टेंट बैरी फैमिली डॉक्टर के साथ पहुँच चुका था।

"मिसेज़ स्मिथ, डॉक्टर आ गए हैं।"

एलेन ने अभी की बात एक तरफ रखी और बेचैनी से कहा, "वीरा अपने कमरे में है। मैं आपको वहाँ ले चलती हूँ।"

डॉक्टर ने तुरंत वीरा की पूरी जाँच की, जबकि ऐलेन घबराई हुई पास ही खड़ी रही।

थर्मामीटर देखकर डॉक्टर ने धीरे-धीरे सिर हिलाया। “मिसेज़ स्मिथ, वीरा को वायरस का नया म्यूटेशन हो गया है। फिलहाल इसका कोई असरदार इलाज नहीं है।”

“आपने… क्या कहा?” ऐलेन लड़खड़ाकर पीछे हट गई, जैसे दुनिया अचानक उसके इर्द-गिर्द घूमने लगी हो।

कोई इलाज नहीं? उसकी वीरा का क्या होगा?

काँपते हाथों से ऐलेन ने फ़ोन निकाला और आर्थर को कॉल किया। उसके संपर्कों से तो कोई रास्ता निकल ही आना चाहिए था।

लेकिन जैसा उसने सोचा था, उधर से कोई जवाब नहीं मिला।

ऐलेन का उड़ा हुआ चेहरा देखकर बैरी हिचकिचाया, फिर आखिरकार उसने अपना फ़ोन निकालकर कॉल किया। लगभग तुरंत ही कॉल लग गई।

ऐलेन की नज़र फ़ोन की स्क्रीन से झटके से ऊपर उठी, और उसकी पकड़ अनजाने में और कस गई।

पत्नी होकर भी वह आर्थर तक नहीं पहुँच पा रही थी, और बैरी—एक असिस्टेंट—को फौरन जवाब मिल गया। कैसी विडंबना।

वह और आर्थर एक ही छत के नीचे रहने वाले अजनबी थे!

शादी के शुरू में उनके बीच भावनाएँ बहुत गहरी नहीं थीं, फिर भी उसकी प्रेग्नेंसी के दौरान आर्थर ज़्यादा ख्याल रखने लगा था। उसे उसकी पसंद-नापसंद याद रहती, खुद खाना बनाकर खिलाता, और हर मौके पर तोहफों की बरसात कर देता।

वे दोनों साथ मिलकर बच्चों के आने का इंतज़ार करते थे—नाम चुनते, ज़रूरी सामान तय करते। उसने अपने हाथों से पालना तक जोड़ा था।

ऐलेन अक्सर सोचती—काश ज़िंदगी हमेशा ऐसी ही रहती। एक दिन आर्थर सचमुच उससे प्यार करने लगेगा, और वे एक खुशहाल परिवार बन जाएंगे।

लेकिन ये सारे सपने और ख्वाब उस दिन चकनाचूर हो गए, जिस दिन एमिली विदेश से लौट आई।

“डॉक्टर आ गया?” फोन में आर्थर की आवाज़ आई, और ऐलेन को हकीकत में खींच लाई।

ऐलेन ने फ़ोन अपने हाथ में ले लिया। उसकी आवाज़ पर ज़ोर पड़ रहा था जब उसने पूछा, “वीरा को नया वायरस हो गया है, डॉक्टर कह रहा है कि कोई इलाज नहीं। आप कहाँ हैं? आप कब घर आ पाएँगे?”

आर्थर की आवाज़ शांत थी, “मैं वायरस फैलने वाले सबसे बड़े इलाके में हूँ। मैं और एमिली यहाँ क्वारंटीन में हैं।”

“तो वीरा का क्या? वो तो बेहोश पड़ी है!”

ऐलेन ने अपनी आवाज़ में उठते तूफान को काबू में रखने की कोशिश की।

बच्चों की देखभाल तो दोनों की साझा ज़िम्मेदारी थी।

और फिर भी वो अकेली जूझ रही थी।

यह अकेलापन उसे अंदर से थका और तोड़ रहा था।

आर्थर की पेशानी सिकुड़ी। “मैं और मेडिकल टीमें भेज दूँगा। तुम्हें वीरा का पूरा ध्यान रखना होगा।”

ऐलेन ने फ़ोन को और कसकर पकड़ा, गले में अटकी कड़वाहट निगल गई।

“वीरा को अभी आपकी ज़रूरत है।”

आर्थर की भौंहें और गहराई से सिकुड़ गईं, उसके पतले होंठ चुप्पी में भींच गए।

ऐलेन जवाब का इंतज़ार करती रही, लेकिन जवाब की जगह एमिली की आवाज़ सुनाई दी, “आर्थर, मैंने सब पैक कर लिया है। हम कभी भी निकल सकते हैं।”

ऐलेन ने तुरंत शब्द पकड़ लिए और बेचैनी से पूछा, “आप कहाँ जा रहे हैं?”

आर्थर ने ठंडी आवाज़ में कहा, “वायरस पूरे शहर में फैल रहा है। एमिली की तबीयत नाज़ुक है, इसलिए मैं उसे विदेश ले जा रहा हूँ।”

उसके जवाब ने ऐलेन की आँखों में बची आख़िरी उम्मीद भी बुझा दी।

वह एमिली की सोच रहा था, लेकिन वीरा का क्या? इस संकट में उसकी पत्नी और बच्चों का क्या?

ऐलेन की आवाज़ कड़वाहट से भर गई।

“और मैं? हमारे बच्चे?”

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