अध्याय 204

वह कुछ मेहनत से झुके और दोनों नन्हों के सिर पर एक साथ थपकी दी। आवाज़ में भरपूर अपनापन था। “अरे वाह, मेरे दो अनमोल ख़ज़ाने! परदादा भी तुम्हें बहुत याद कर रहे थे! ज़रा परदादा ठीक से देखे तो सही—कद बढ़ गया है क्या?”

उन्होंने दोनों बच्चों को ध्यान से देखा, नज़र में छलकता प्यार था।

बच्चे जब प्यार से वि...

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