अध्याय 230

कुछ पल बाद उसने सिर उठाया, आँखों में दृढ़ निश्चय था: “मम्मी, मैं सोफ़ी की दोस्त बनना चाहती हूँ! मैं उसके साथ अपनी गुड़िया बाँट सकती हूँ और उसे किंडरगार्टन की मज़ेदार बातें बता सकती हूँ। ऐसे तो वो फिर उदास नहीं रहेगी, है न?”

बेटी के शब्द गर्माहट की लहर की तरह थे, और पल भर में ही एलेन की आँखें भर आईं...

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