अध्याय 248

अगली सुबह, अस्पताल के बिस्तर पर धूप की पहली किरणें ही पड़ी थीं।

कैथी की पलकों ने कुछ बार फड़फड़ाया, फिर वे धीरे-धीरे खुलीं।

उसके सामने एकदम साफ़-सुथरी सफ़ेद छत थी, और होश में आते ही वह पल भर को जैसे दिशा-भ्रमित हो गई।

“मॉम, आप जाग गईं?”

जानी-पहचानी आवाज़ सुनकर कैथी ने सिर घुमाया—सामने उसकी बेटी ...

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