अध्याय 4

उस पल में ही एलैन की दुनिया ढह गई।

उसे लगा जैसे वह किसी अंतहीन बर्फ़ीली खाई में गिर पड़ी हो, और उसी क्षण उसका ख़ून जमकर पत्थर हो गया हो।

वह एमिली की गर्दन पर पड़े लाल निशानों को घूरती रही; उसका दिल इतनी बुरी तरह दुख रहा था कि उसे साँस लेना भी मुश्किल लगने लगा।

वेरा की चहकती आवाज़ धीरे-धीरे उसके कानों में धुँधली पड़ गई और उसकी जगह एक लगातार बजती-सी घंटी ने ले ली।

“एमिली, पापा कहाँ हैं? मुझे उनसे बात करनी है!”

वेरा पैर हिलाती रही, एलैन के मुर्दा-से पीले चेहरे से पूरी तरह बेख़बर।

फोन से कपड़े की सरसराहट की आवाज़ आई, फिर आर्थर की गहरी आवाज़—“वेरा, अब तबीयत कैसी है?”

वह परिचित आवाज़ सुनते ही एलैन का पेट मरोड़ खाने लगा।

कल रात वही किसी दूसरी औरत के कान में फुसफुसा रहा था, और आज सुबह वह ऐसे आराम से वेरा का हाल पूछ रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो।

उसे मितली आने लगी!

उसे शक तो था।

वे सारी रातें जब आर्थर घर नहीं आया, वे पल जब एमिली का फोन उसे फौरन बुला ले जाता था।

पर उसने हमेशा खुद को समझाया, यह मानकर कि वे “बस दोस्त” हैं—जैसा आर्थर कहता था।

साफ़ है, ऐसा नहीं था।

एलैन अब खुद को रोक नहीं पाई। आखिरकार आँसू उसके गालों से लुढ़क पड़े, एक-एक करके उन कपड़ों पर गिरते गए जिन्हें उसने रातभर देखभाल के बाद भी नहीं बदला था।

कॉल जल्दी ही खत्म हो गई, और वेरा ने अनमने मन से अपनी घड़ी नीचे रख दी।

वह उसे कसकर पकड़े रही; उसके छोटे होंठ रूठकर फूल गए, आँखें अब भी नम थीं। “एमिली ने इतनी जल्दी फोन क्यों काट दिया…”

वह शिकायत करने एलैन की तरफ मुड़ी, लेकिन उसे पलंग के पास बैठे देख ठिठक गई—पीठ एकदम तनी हुई, चेहरा राख-सा।

उसकी आँखें खाली और बेध्यान थीं; वेरा की हरकत तक दर्ज नहीं कर रही थीं। वह जैसे पूरी तरह बेजान हो।

वेरा के भीतर अजीब-सी झुंझलाहट उभर आई।

उसे एलैन का ऐसा होना अच्छा नहीं लगता था—हर बात का इतना बड़ा बना देना; एमिली की तरह नहीं, जो मुस्कुराती तो कितनी अच्छी लगती।

वेरा ने पाँव पटका, उसका छोटा चेहरा तुरंत सिकुड़ गया।

“मम्मी, आप हमेशा ऐसी ही क्यों रहती हो? इतनी उदास और चिड़चिड़ी।”

इतना कहकर उसने अपनी छोटी-सी कंबल उठाई, अपने चारों तरफ लपेटी, और खटखटाते कदमों से पलंग से उतरकर बिना पीछे देखे कमरे से बाहर भाग गई।

वेरा के नफ़रत भरे शब्द एलैन के कानों में तीर की तरह चुभे। उसने मुँह खोला, पर आवाज़ निकल ही नहीं पाई।

वेरा की उछलती-फाँदती परछाईं को गायब होते देख, एलैन के पैरों से जैसे जान निकल गई और वह पलंग के किनारे पर ढह गई।

बगल की मेज़ पर पिछले साल की परिवार की फोटो रखी थी—आर्थर का हाथ उसकी कमर पर, और दोनों बच्चे खुशी से दमकते चेहरे लिए हुए।

आज उसे देखकर एलैन को वह असहनीय रूप से व्यंग्य-सी लगी।

अगले दिनों में वायरस डरावनी रफ़्तार से फैलने लगा।

टीवी पर चौबीसों घंटे महामारी की खबरें चलती रहतीं, और हर दिन मौतों का आंकड़ा नए रिकॉर्ड तोड़ता।

एलैन खुद को रसोई में बंद कर लेती—काढ़ा और दवाइयाँ बनाती हुई, एंकर की रिपोर्टें सुनती रहती।

इन्हीं दिनों में उसने सेनेटाइज़र और मास्क का ढेर जमा कर लिया था, बच्चों का तापमान दिन में तीन बार नापती, और वे जिन खिलौनों को छूते, उन्हें बार-बार अल्कोहल से पोंछती।

लेकिन बच्चों का सब्र कब का जवाब दे चुका था।

“मम्मी, मुझे नीचे स्कूटर चलाना है! बाहर लोग टहल रहे हैं!”

जूलियस ने खिड़की से चेहरा चिपकाया हुआ था; उसके लहजे में बेसब्री भरी थी।

एलैन ने अभी उसे खींचकर हटाया ही था कि वेरा अपना सॉफ्ट टॉय सीने से लगाकर रूठ गई, “मुझे स्ट्रॉबेरी मिल्क टी चाहिए। आपने वादा किया था—मैं ठीक हो जाऊँगी तो दिला दोगी।”

“बाहर सुरक्षित नहीं है, और बबल टी की दुकान भी बंद है। बस थोड़ा और रुक जाओ, ठीक है?”

एलैन ने धैर्य से समझाया।

उसने ताज़ा बना काढ़ा आगे बढ़ाया; उसकी आवाज़ थकी हुई थी। “लो, इसे पी लो।”

उसने यह नुस्खा ढूँढ़ने के लिए मेडिकल किताबें तक छान मारी थीं—यह वायरस को ठीक नहीं कर सकता था, मगर कम-से-कम लक्षणों को कुछ हद तक कम कर सकता था।

वेरा की उल्टियाँ फिलहाल रुक गई थीं, लेकिन उसका चेहरा अब भी पीला था।

“मुझे ये फिर से क्यों पीना है? कितना कड़वा है!”

वेरा ने कटोरा धकेल दिया। दिन भर की मेहनत से उबाली गई दवा मेज़पोश पर छलक गई।

एलेन ने थककर अपनी कनपटियाँ मलीं। “बेटा, ठीक होने के लिए पीना पड़ेगा।”

“एमिली मुझसे इतना गंदा कुछ कभी नहीं पिलवाती! आप बहुत बुरी हैं! मुझे आप नहीं चाहिए!”

वेरा अचानक चिल्लाई, “मुझे पापा के पास जाना है!”

खिड़की से हटाकर लाए गए जूलियस ने ठंडे स्वर में जोड़ दिया, “आप बस हम पर हुक्म चलाना चाहती हैं। एमिली हमसे आपसे बेहतर रहती है! आप कितनी चिढ़ाने वाली हैं!”

अपने बच्चों के मुँह से फिर वही चुभते शब्द सुनकर एलेन पर जैसे बिजली गिर पड़ी। वह सन्न रह गई।

वेरा के बुखार की देखभाल करते हुए उसने पूरी रात आँख नहीं लगाई थी, फिर भी उनकी नज़र में वह एमिली के बराबर नहीं थी—जो बस उन्हें मिठाइयाँ खिला देती थी।

पैरों से एक अनजान-सी सिहरन ऊपर चढ़ने लगी। नज़र धुँधली हुई, और कमरा भी जैसे धुँधला पड़ गया।

शाम होने से पहले ही जुड़वाँ बच्चों की तकरार फिर ड्रॉइंग रूम में गूँजने लगी।

“मुझे एमिली से मिलना है! मुझे अभी जाना है!”

वेरा कालीन पर बैठी थी, उसकी बाँहों में पकड़ा हुआ खिलौना उसके कसकर दबाने से टेढ़ा-मेढ़ा हो गया था।

“सब आपकी वजह से है। अगर आपने हमें बाहर जाने से नहीं रोका होता, तो हम अब तक पापा के पास होते!”

पास खड़ा जूलियस, छोटी-सी भौंहें सिकोड़े, बोला, “हां! अगर आपने हमें रोका नहीं होता, तो हम अभी विमान में होते—यहाँ आपके साथ फँसे नहीं होते!”

एलेन गरम किया हुआ दूध लेकर अभी-अभी अंदर आई थी, और यह सुनते ही उसके कदम ठिठक गए।

“बाहर वायरस इतना फैल रहा है। हम कैसे जा सकते हैं?”

उसने दूध कॉफी टेबल पर रखा और आवाज़ को नरम रखने की कोशिश की। “पहले थोड़ा दूध पी लो, नहीं तो भूख लगेगी।”

“मुझे नहीं चाहिए!”

जूलियस ने टेबल के पाये पर लात मारी, और कप का ज़्यादातर दूध छलक गया।

“अगर आप हमें एमिली के पास जाने में मदद नहीं करेंगी, तो हम कुछ नहीं खाएँगे! आपके बनाए को छूने से अच्छा हम भूखे रह लें!”

वेरा ने तुरंत सिर हिला दिया, उसका छोटा-सा चेहरा ज़िद से भर गया। “हाँ! खाना नहीं! जब तक आप हमें अभी के अभी एमिली के पास नहीं ले जातीं!”

अपने बच्चों की आँसुओं से भरी आँखें देखकर एलेन को लगा वह बिल्कुल बेबस है।

एलेन के चुप रहने पर जूलियस और भड़क गया।

“काश आप मेरी माँ ही नहीं होतीं!”

वह उसे घूरने लगा, उसका छोटा-सा चेहरा गुस्से से लाल था। “अगर आप नहीं होतीं, तो पापा ने एमिली से शादी कर ली होती, और हम हर समय उसके साथ होते!”

“जूलियस!”

एलेन की आवाज़ अचानक ऊँची हो गई, और उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

वही शब्द—एक ही दिन में दूसरी बार।

वे शब्द ज़हर जैसे थे—मानो किसी ने उसके दिल के सबसे नाज़ुक हिस्से में चाकू घोंप दिया हो।

उसने उन दोनों बच्चों को देखा जिन्हें दुनिया में लाने के लिए उसने अपनी जान दाँव पर लगा दी थी। उनकी आँखों में तिरस्कार की ठंडक बाहर के वायरस से भी ज़्यादा सिहरा देने वाली थी।

एलेन अचानक इतनी थक गई कि समझाने तक की ताकत नहीं बची।

हर पल उसके दिल में ठंड बढ़ती गई, और सिहरन उसकी बाँहों-टाँगों में फैलती चली गई।

वह देर तक चुप रही, जब तक कि ड्रॉइंग रूम में रोना-धोना धीरे-धीरे थम नहीं गया।

आख़िरकार उसने धीरे से सिर उठाया—उसकी आँखों की रोशनी पूरी तरह बुझ चुकी थी।

“ठीक है।” उसने बहुत धीमे कहा, उसकी आवाज़ अजीब-सी शांत थी। “अपना सामान पैक कर लो।”

जुड़वाँ बच्चे जड़ हो गए, उनका रोना रुक गया।

“मैं तुम्हारे पापा को फोन करती हूँ।”

एलेन सोफे की ओर मुड़ी और फोन उठा लिया। उसकी उँगलियाँ अब भी बेकाबू काँप रही थीं। “मैं उनसे कहूँगी कि आकर तुम दोनों को ले जाएँ।”

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