अध्याय 44

उसने डिब्बा झटके से बंद कर दिया, दबे हुए गुस्से से उसकी आवाज़ कस गई, “ठीक है, तुम्हें नहीं चाहिए? औरों की तो कमी नहीं है!”

जैसे ही ये शब्द उसके मुँह से निकले, उसे पछतावा हुआ,

लेकिन ऐलेन की लगातार बेरुख़ी देखकर वह पछतावा भी जल्दी ही ज़िद्दी अहंकार में दब गया।

ऐलेन ने डिब्बे की तरफ़ देखा तक नहीं; व...

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