अध्याय 5
उन शब्दों के बाद वह ड्रॉइंग-रूम के मुख्य बैठने वाले हिस्से में सोफ़े पर जाकर बैठ गई। मोबाइल की स्क्रीन के ऊपर उसकी उँगली देर तक यूँ ही रुकी रही।
एक पूरा मिनट बीत गया, तब जाकर उसने वह नंबर दबाया जो उसे ज़ुबानी याद था।
खाली कमरे में डायल होने की “बीप-बीप” की आवाज़ अजीब तरह से बहुत साफ़ सुनाई दे रही थी।
यह देखकर दोनों बच्चे अपनी शरारतें रोककर चुप हो गए और बड़ी उत्सुकता से ऐलेन की फोन पर होने वाली बात का नतीजा देखने लगे। फोन बहुत देर तक बजता रहा, यहाँ तक कि ऐलेन का हाथ सुन्न होने लगा।
आख़िरकार कॉल लग गई, और उधर से आर्थर की झुँझलाहट भरी आवाज़ आई, “अब क्या है?”
उसके बोलते ही पीछे कहीं एमिली की धीमी-सी आवाज़ भी हल्के से सुनाई दी।
ऐलेन के सीने में कसाव-सा हुआ, साँस जैसे अटकने लगी, फिर उसने कहा, “किसी को भेजो, जो वीरा और जूलियस को यहाँ से ले जाए।”
“क्या कहा तुमने?”
आर्थर की आवाज़ पलभर में ठंडी और सख़्त हो गई। “बाहर क्या हाल है, देखा है? तुम बच्चों को बाहर भेजना चाहती हो? वीरा अभी बुखार से ठीक हुई है—तुम्हें उनका ज़्यादा ध्यान नहीं रखना चाहिए?”
“ये दोनों तुम्हें और एमिली को देखने की ज़िद कर रहे हैं।”
ऐलेन का लहजा पहले जैसी नरमी वाला नहीं रहा। आर्थर से बात करते हुए उसकी आवाज़ में हल्की-सी तल्ख़ी घुल गई थी।
“सिर्फ़ इस वजह से?”
आर्थर के स्वर में चिढ़ साफ़ झलक रही थी। “बच्चों को क्या समझ है? बेवजह हठ मत करो और उन्हें उनके कमरे में ले जाकर सुला दो, आराम करने दो।”
तभी फोन पर एमिली की नर्म आवाज़ आई, जैसे बीच-बचाव कर रही हो, “आर्थर, क्या मैं फिर से तुम्हारे लिए मुसीबत बन रही हूँ? शायद मुझे…”
“उसकी चिंता मत करो।”
आर्थर का स्वर तुरंत मुलायम हो गया, लेकिन जब उसने फिर ऐलेन से बात की, तो उसकी आवाज़ जमी हुई बर्फ़ जैसी बेरंग थी। “गुस्सा भी हालात देखकर करना चाहिए। एमिली को अभी मेरी ज़रूरत है। तुम बस बच्चों को ठीक से संभालो।”
उसकी बातों में एमिली को बचाने का भाव भी साफ़ था। मोबाइल पकड़े ऐलेन का हाथ एक पल को ठहर गया।
उसके होंठों पर ठंडी मुस्कान तिर गई—जैसे कड़ाके की सर्दी में लटकी बर्फ़ की नोक।
“आर्थर, हाथ दिल पर रखकर बताओ—इन चार सालों में तुमने बच्चों के साथ कितनी बार ढंग से पूरा खाना खाया है? जब वीरा चाहती थी कि तुम उसे स्कूल से लेने आओ, तुमने कहा तुम एमिली को कला प्रदर्शनी में ले जा रहे हो। जब जूलियस बीमार था और उसे अपने पिता का सहारा चाहिए था, तुमने कहा तुम एमिली की स्टूडियो वाली समस्याएँ सुलझा रहे हो…”
“तुम जानबूझकर पुरानी बातें उछाल रही हो?”
आर्थर की आवाज़ और भारी हो गई, उसमें नाराज़गी और अपने साथ ‘नाइंसाफी’ होने का भाव घुला था। “एमिली की परिस्थिति आम नहीं है। उसे सुरक्षित रखना मेरा हक़ भी है और ज़िम्मेदारी भी। बच्चे तो तुम्हारे पास ही रहते हैं, तुम हमेशा उनके साथ रही हो न?”
“क्या बच्चों को पिता की ज़रूरत नहीं होती? जब-जब उन्हें तुम्हारी ज़रूरत पड़ी, तुम एमिली के साथ थे…”
“बस!”
आर्थर ने फिर उसकी बात बीच में काट दी।
उसका सब्र जवाब दे चुका था।
ऐलेन चुप हो गई। उसके भीतर जैसे सारी ताक़त खत्म हो चुकी थी।
वह तो बस सच कह रही थी, लेकिन इससे आर्थर और ज्यादा अपनी जगह बचाने लगा, और उसकी झेंप भी उतनी ही बढ़ गई। रात के अँधेरे में जब बच्चों को तेज़ बुखार चढ़ता, तो वही एक को गोद में उठाकर और दूसरे का हाथ पकड़े जल्दी-जल्दी अस्पताल भागती थी। जब वे खाने में नखरे करते, तो वही तरह-तरह का पौष्टिक खाना बनाती थी।
और वह? या तो एमिली का बहाना बनाकर घर से ध्यान हटा देता, या फिर कह देता कि किसी का “एहसान चुकाना” है, इसलिए वह अपनी पत्नी और बच्चों को समय नहीं दे सकता।
इन सारे सालों में बच्चों को दिल से संभालने वाली सिर्फ़ वही रही थी।
आर्थर को कुछ पता ही नहीं था, फिर भी जब उसने उससे बच्चों को लेने को कहा, तो उसमें इतनी हिम्मत थी कि उल्टा उसी पर इल्ज़ाम लगा दे कि वह माँ होने की ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रही।
उसे यह सब हास्यास्पद लगा।
लेकिन वह इतनी थक चुकी थी कि बहस करने की ऊर्जा भी नहीं बची थी। कुछ बातें बार-बार दोहराई जाएँ, तो उन्हें कहना भी अपने ही मन को बेमज़ा और उबाऊ लगने लगता है।
लेकिन वह इस कदर थकी हुई थी कि बहस करने की ताक़त ही नहीं बची थी। कुछ बातें, जब उन्हें बार-बार दोहराया जाए, तो अपने ही दिमाग़ को उबाऊ और बेस्वाद लगने लगती हैं।
जैसे ही “ट्रांसमिशन पूरा हुआ” का संदेश स्क्रीन पर दिखा, एलेन ने डिवाइस में बोलते हुए कहा, “मैंने तुम्हें रिकॉर्ड की हुई ऑडियो भेज दी है। तुम खुद सुनकर जांच लो। बच्चों को एमिली को ढूँढना है। मैंने उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया।”
आर्थर ने तुरंत वीडियो खोला, मगर जैसे-जैसे उसकी नज़र स्क्रीन पर चली, उसकी भौंहें और भी सिकुड़ गईं।
फोन से उसकी आवाज़ कड़ाई से निकली, लहजे में ऊपर से देखने वाला घमंड साफ़ था। वह बोला, “बच्चों की उम्र अभी सिर्फ़ चार साल है। उन्हें क्या समझ है? क्या तुमने जान-बूझकर उनसे ये बातें कहलवाई हैं?”
फिर आर्थर ने बात पलट दी, “क्या तुम मुझे वापस बुलाने की कोशिश कर रही हो?”
“मैं…”
एलेन को कुछ कहने का मौका मिलने से पहले ही आर्थर ने फिर काट दिया, “मैं इस वक्त यहाँ से जा नहीं सकता। एमिली के माँ-बाप मेरी वजह से मारे गए थे। बीमारी इतनी खतरनाक है, तो क्या तुम चाहती हो कि वो भी मर जाए?”
फिर जैसे कुछ याद आ गया हो, उसने जान-बूझकर जोर देकर कहा, “और वैसे भी, एमिली और मेरा रिश्ता बिल्कुल पाक-साफ़ है। मैं उसका ख्याल सिर्फ़ एहसान के बदले करता हूँ। मीडिया की बेबुनियाद अफ़वाहों में मत आओ, और बच्चों का दिमाग़ मत बिगाड़ो।”
फोन पर एमिली की नरम आवाज़ फिर आई, जैसे बीच-बचाव करना चाहती हो, “आर्थर, एलेन से मत लड़ो। तुम्हें मेरे साथ यहाँ लाने की गलती मेरी है। तुम बच्चों के पास चले जाओ।”
“गलती इसकी है, तुम्हारी नहीं।”
जो आर्थर थोड़ी देर पहले तक लगातार आलोचनाएँ बरसा रहा था, उसकी आवाज़ एकदम मुलायम हो गई—और उसी के साथ एलेन के लिए उसकी झुंझलाहट दोगुनी।
मामला पहले ही इतना उलझा हुआ था, फिर भी एमिली इतनी समझदार थी कि उसे बच्चों को प्राथमिकता देने को कह रही थी।
और बच्चों की माँ एलेन—एमिली जितनी भी समझदार नहीं।
वह तो बस कर्ज़-ए-ज़िंदगी चुकाने के लिए एमिली का ज़्यादा ख्याल रख रहा था। क्या एलेन इतना भी बर्दाश्त नहीं कर सकती?
उसे समझ नहीं आता था कि वह किस बात का हंगामा कर रही है, और ऐसे वक्त में भी बच्चों को यहाँ भेजने पर क्यों अड़ी है।
उधर लाइन पर आर्थर अपनी “बेदाग़” रिश्ते वाली रट लगाए हुए था, और इधर एलेन ने डिवाइस को कान से हटाकर एक तरफ रख दिया था।
उसे अचानक सब बेमतलब लगने लगा।
जैसे हवा में मुक्के मारना—सारी ताक़त बेकार जा रही हो।
सालों से वह ये शब्द अनगिनत बार सुन चुकी थी।
हर बार वह उस पर यक़ीन करती, हर बार खुद को धोखा देती।
लेकिन अब वह यह नाटक आगे नहीं निभाना चाहती थी।
बेहिसाब, उसके दिमाग़ में कल रात वीरा की एमिली के साथ हुई वीडियो कॉल की तस्वीर चमक गई।
उसकी गर्दन पर पड़ा वो किस का निशान—वह कभी नहीं भूल पाएगी।
और न ही आर्थर की “मासूमियत” वाली दलील पर अब उसे भरोसा होगा।
अब पीछे देखती तो सब कुछ बस तंज़ जैसा लगता।
इसी पल, एलेन को याद आया—जब वह बीस साल की थी, और हेज़ल क्लार्क ने उसके मास्टर्स में एडमिशन के लेटर को पकड़कर रोते हुए कहा था, “एलेन, तुम पागल हो! डॉ. हैरिस की बेटी को रसोई में कैद नहीं होना चाहिए।”
तब उसने एक सीधी-सी, अनुभवहीन मुस्कान के साथ अपनी उंगली में अभी-अभी पहनाई गई गोल सी अंगूठी को छुआ था और कहा था, “मैं यह इसलिए कर रही हूँ क्योंकि मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ।”
उससे इतना प्यार कि अपनी माँ कैथी हैरिस के रिसर्च मैटेरियल्स को तिजोरी में बंद कर दिया, इतना प्यार कि रोज़ कुकबुक पढ़ी और “मिसेज़ स्मिथ” की पहचान को अपने दिनचर्या में गढ़ लिया।
वह किसी लैब में हो सकती थी—वायरस से लड़ती हुई।
मगर वह यहाँ थी—बच्चों के नाश्तों और पति की देर रात की घर वापसी से जूझती हुई।
उसे सब कुछ पूरी तरह निरर्थक लगा।
उधर से आवाज़ आती रही, और जब आर्थर ने देखा कि वह जवाब नहीं दे रही, तो उसने आवाज़ ऊँची कर दी और बोला, “तुमने मेरी बात सुनी? एमिली और मैं…”
“हूँ।”
एलेन ने बहुत धीमे से जवाब दिया, उसकी बात काटते हुए—कल के उस किस के निशान पर अब और नहीं टिकना चाहती थी।
“बाक़ी हम बिना कहे छोड़ देते हैं, लेकिन बच्चों को तुम्हें ढूँढना है। जो तुम्हें सही लगे, कर लो।”
आर्थर ठिठक गया, जैसे ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। उसका लहजा थोड़ा नरम पड़ा, “मैं ऐसा नहीं कर सकता…”
“और एक बात।”
एलेन ने फिर बीच में रोका। खिड़की के बाहर की गर्म धूप को देखते हुए, उसका दिल भीतर तक डूब गया।
“हम तलाक़ ले लेते हैं।”
