अध्याय 1
लैला अपनी कार में चुपचाप बैठी थी, बारिश के पार झांकती उसकी निगाह सामने खुलते दृश्य को बेध रही थी।
हेवन सिटी की शाम की मूसलाधार बारिश उसकी सेडान के विंडशील्ड पर ढोल की तरह बज रही थी; दृश्य धुंधला हो रहा था, मगर वह नज़ारा फिर भी छिप नहीं पा रहा था जो उसके दिल में खंजर की तरह उतर रहा था।
उसके हाथ अनायास ही स्टीयरिंग व्हील को और कसकर जकड़ गए; दबाव से उंगलियों के जोड़ सफेद पड़ने लगे।
महंगे रेस्तरां के बाहर उसका पति, सेथ स्टैंटन, एक जवान लड़की को जुनून से चूम रहा था—दोनों एक-दूसरे में ऐसे खोए थे जैसे दुनिया में और कुछ हो ही नहीं।
एक पल को लड़की जैसे सांस के लिए जूझी, हल्का-सा अलग होने की कोशिश की, पर सेथ ने अपनी हथेली उसके सिर के पीछे रखकर उसे और पास खींच लिया, चुंबन को और गहरा कर दिया।
वह बहुत कम उम्र की लग रही थी—सफेद शिफॉन की ब्लाउज़ और हल्की नीली जींस में, इतनी मासूम कि अभी-अभी कॉलेज से निकली हुई लगे।
जब सेथ का फोन आया था, लैला पहले ही सो चुकी थी। यह सुनकर कि बिज़नेस डिनर के बाद उसने ज़्यादा पी ली है और गाड़ी नहीं चला सकता, वह कपड़े बदले बिना बस ट्रेंच कोट डालकर भागी चली आई थी।
जो सफर पंद्रह मिनट का होना चाहिए था, उसने दस से भी कम में पूरा कर लिया—और पहुंचकर रेस्तरां के दरवाज़े पर यह दृश्य देख लिया।
वह कार से नहीं उतरी। बस चुपचाप देखती रही, जब तक कि शोक उसके सीने में भरकर उसे सांस लेना मुश्किल न कर दे। तभी उसने धीरे-धीरे फोन उठाकर सेथ को कॉल किया।
कार की खिड़की के पार उसने देखा—रिंगटोन से सेथ की भौंहें झुंझलाहट में सिकुड़ गईं। आखिरकार उसने लड़की को छोड़ा और जेब से फोन निकाल लिया।
“हाँ?” उसकी आवाज़ में साफ़ चिढ़ थी।
“गाड़ी में बैठो,” लैला ने रूखेपन से कहा।
सेथ ठिठका, फोन हाथ में लिए कर्ब की ओर देखने लगा। कार की खिड़की के आर-पार उनकी नज़रें मिलीं। लैला ने तुरंत नजर फेर ली, जैसे एक पल और रुकती तो टूटकर बिखर जाती।
एक मिनट बाद पैसेंजर साइड का दरवाज़ा खुला, और सेथ अंदर आ बैठा। कार में शराब की तीखी गंध भर गई।
लैला ने ऊपर देखा तो लड़की गायब थी। वह उसे जाते हुए भी नहीं देख पाई।
“कब तक घूरती रहोगी?” सेथ ने पलकों को थोड़ा उठाकर उसकी तरफ देखा।
पत्नी के सामने पकड़े जाने पर भी सेथ के चेहरे पर घबराहट या डर की कोई रेखा नहीं थी।
सच कहें तो, उसे लगा ही नहीं कि लैला ऐसा कोई इंसान है जिसकी वजह से उसे फिक्र करनी चाहिए।
इस रवैये की वजह एक ही थी—वह अमीर था, बेहिसाब अमीर।
जब तक लैला रोती नहीं, हंगामा नहीं करती, और जैसा कहा जाए वैसा करती रहे, वह उसे हर भौतिक जरूरत मुहैया करा देगा—सब कुछ, सिवाय अपनापन के।
“मुझे पता था तुम किसी से मिल रहे हो, लेकिन मुझे नहीं लगा था कि इस तरह की...। क्या तुमने जान-बूझकर मुझे यहां बुलाया ताकि मैं खुद देख लूं?” लैला की आंखों में अंतहीन उदासी थी—जैसे भीतर बस वीरानी बची हो।
सेथ की नजर ठंडी और कठोर थी, उसमें तिरस्कार और घृणा भरी हुई थी। “तुम्हें क्या? मुझे जो करना है, उस पर सवाल उठाने का तुम्हें कोई हक नहीं। क्या? अब तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे साथ सोऊँ?”
गंदी बात उसके होठों से बिना किसी झिझक के निकल गई। लैला को लगा जैसे उसका दिल चीर दिया गया हो, और एक सुन्न-सी पीड़ा उसके सीने में फैलती चली गई।
उसने उसे कभी पत्नी की तरह नहीं माना; “साथ सोने वाली” कहना भी जैसे उस पर मेहरबानी करना हो।
लैला ने गहरी सांस ली, सीने में उठती कड़वाहट को दबाया। वह चुप रही और बस कार स्टार्ट कर दी।
लेकिन बगल वाली सीट पर बैठा आदमी अपने अगले शब्दों से लैला के दिल में खंजर और गहरा कर गया।
“मैं घर नहीं जा रहा। मुझे नॉर्थ शोर हाइट्स ले चलो।”
नॉर्थ शोर हाइट्स हेवन सिटी के सबसे रईस इलाकों में से एक था, जहां औसतन घरों की कीमत करीब डेढ़ करोड़ डॉलर के आसपास थी।
लैला जानती थी कि वहां सेथ की कई प्रॉपर्टी थीं, मगर वह कभी उनमें रहा नहीं—बस खरीदकर खाली छोड़ देता था।
आज रात नॉर्थ शोर हाइट्स जाने की उसकी मांग का मतलब साफ़ था: वही उसका “घर” था—उस लड़की के साथ, जिसे लैला ने अभी देखा था।
सेथ औरतों के मामले में हमेशा उदार रहा था; संभव है वह घर पहले ही उसे दे चुका हो।
शादी के तीन सालों में अगर सेथ महीने में पांच बार घर आ जाए तो उसे “ज़्यादा” कहा जाता। लैला हमेशा सोचती रही कि वह ऑफिस में इसलिए रुकता है क्योंकि उसे उसे देखना नहीं, या फिर वह दूसरी औरतों के साथ होटलों में ठहरता है। अब लैला को पूरी तरह समझ आ गया था कि वह तो शुरुआत से ही नॉर्थ शोर हाइट्स में उसी लड़की के साथ रह रहा था।
लैला ने स्टीयरिंग व्हील को कसकर थाम रखा था। सीने से उठती जलन-सी पीड़ा हर नस के आख़िरी सिरे तक फैल रही थी, फिर भी उसने अपने चेहरे पर कोई शिकन नहीं आने दी।
“वैसे, कल रात तुम्हारी दादी का जन्मदिन है। भूलना मत।”
सेथ ने बेरुख़ी से कहा, “मैं नहीं भूला। अगर मैं नहीं आ पाया तो तुम अकेले चली जाना। तुम्हें पता है क्या कहना है। दादी के लिए तोहफ़ा मैं पहले ही ले चुका हूँ; साथ ले जाना।”
“तुम अपनी दादी के जन्मदिन पर नहीं जाओगे? क्या उनका दिल नहीं टूटेगा?” लैला ने होंठ भींच लिए।
उस आदमी की आँखों में गहरी उपहासभरी चमक उतर आई। “मैं जो कहूँ, वही करो। मुझे समझाने चली हो? वो मेरी दादी हैं, तुम्हारी नहीं। अगर उन्हें मुझे डाँटना होगा तो वो मुझे सीधे फ़ोन करेंगी। मुझे तुम्हारा बीच में टाँग अड़ाना नहीं चाहिए।”
लैला ने अपना निचला होंठ ज़ोर से दाँतों में दबा लिया, देर तक कुछ कह ही नहीं पाई।
हाँ, वह सचमुच अपनी हद से आगे बढ़ गई थी।
पंद्रह मिनट बाद कार नॉर्थ शोर हाइट्स पहुँच गई। सेथ ने बस उसे गेट पर रोकने को कहा, फिर उतरकर बिना पीछे देखे अंदर चला गया।
लैला ने भी रुकने का नाम नहीं लिया। उसने गाड़ी मोड़ी और वापस निकल गई।
ओशनव्यू एस्टेट लौटकर लैला लाश की तरह बिस्तर पर ढह गई। उसने छत को शून्य नज़रों से घूरा, फिर आँखें बंद कर लीं और चुपचाप आँसुओं को बहने दिया।
अगले दिन, जैसा लैला को अंदेशा था, सेथ ने काम का बहाना बनाया और उसे अपनी दादी के जन्मदिन की पार्टी में अकेले भेज दिया।
जब एलिज़ाबेथ स्टैंटन को पता चला, तो वह आगबबूला हो उठीं—पहले अपने पोते को फ़ोन करके लताड़ा, फिर लैला को कॉल कर के उस पर बरस पड़ीं।
“शादी को तीन साल हो गए और तुम अब भी उसे संभाल नहीं पातीं? इन सालों में करती क्या रही हो? मैंने तुम्हें सिखाया नहीं था? मर्दों का इधर-उधर मुँह मारना तो चलता रहता है, मगर औरत को उसे बिस्तर पर बाँधकर रखना आता होना चाहिए। इतना भी नहीं कर सकतीं?”
लैला का चेहरा धीरे-धीरे पीला पड़ गया। उसने होंठ कसकर दबाए और कहा, “माफ़ कीजिए, दादी। उसका दिल मेरे साथ नहीं है।”
एलिज़ाबेथ की आवाज़ सख़्त हो गई। “मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि उसका दिल तुम्हारे साथ है या नहीं। अब तुम स्टैंटन परिवार की बहू हो। लोग ये बातें फैलाएँ कि स्टैंटन अपनी बहू को ठीक से नहीं रखते—ये हम नहीं होने दे सकते। फिर स्टैंटन परिवार की इज़्ज़त कहाँ जाएगी? उस वक़्त तुमने सेथ की जान बचाई थी, और अगर मेरे पति ने ज़िद करके तुम्हें सेथ की पत्नी न बनवाया होता, तो मैं कभी राज़ी नहीं होती। वरना तुम दोनों की हालत ऐसी कैसे होती? तीन साल हो गए, और मैं अब तक परपोते की शक्ल तक नहीं देख पाई।”
लैला ने पलटकर कुछ नहीं कहा। उसने बस एलिज़ाबेथ को तरह-तरह से उसे अपमानित करने दिया, और आखिर में यह कहकर फ़ोन काट दिया कि वह भी जन्मदिन के भोज में न आएँ।
एक के बाद एक इन चोटों के बाद लैला का मनोबल धीरे-धीरे चूर हो चुका था। वह सोफे पर सुन्न बैठी रही, जैसे उसकी रूह ही निकाल ली गई हो।
पाँच साल पहले, लैला के पिता थॉमस मोंटगोमरी को धोखे में फँसाया गया था। उनकी कंपनी औने-पौने दामों में हड़प ली गई और पूरा मोंटगोमरी परिवार कंगाल हो गया।
सदमा सह न पाने के कारण उनके पिता को दिमाग़ में रक्तस्राव हुआ और एक हफ्ते बाद उनकी मौत हो गई।
उसकी माँ, सुसान मोंटगोमरी, ने उसे छोड़कर नए-नए अमीर बने रॉबर्ट हॉकिन्स से दूसरी शादी कर ली।
लेकिन अच्छे दिन टिके नहीं। रॉबर्ट जुए में सब कुछ हार गया और आखिरकार जेल पहुँच गया।
तीन साल पहले, जब सुसान को पता चला कि लैला की शादी सेथ स्टैंटन से हो गई है, तो वह फिर घिसटती हुई वापस आ गई।
खून के रिश्ते और नरम दिल के कारण लैला कभी-कभी माँ को पैसे दे देती थी, जिससे सुसान पिछले कुछ सालों से काफ़ी आराम से जी रही थी।
मुसीबत बस ये थी कि रॉबर्ट के जेल जाने के बाद उसकी पहली शादी से एक बेटा रह गया था—ब्रायन हॉकिन्स, पढ़ाई में निकम्मा और झगड़ालू, जो कॉलेज तक भी नहीं जा सका और यूँ ही आवारागर्दी करता रहा।
सुसान सालों से उसे पाल रही थी, और लैला भी इसमें घसीट ली गई। लैला खूबसूरत थी और सेथ उसे नज़रअंदाज़ करता था, इसलिए ब्रायन अक्सर उसे तंग करता रहता।
जल्दी से पास्ता का एक कटोरा बनाकर लैला आराम करने ही वाली थी कि दरवाज़े की घंटी बज उठी।
हैरान होकर वह नीचे दरवाज़े तक गई और वीडियो इंटरकॉम देखा। सामने कौन है, यह देखते ही उसके दिल की धड़कन कस गई।
