अध्याय 2
दरवाज़े के बाहर ब्रायन खड़ा था—वही, जो कई महीनों से उसे परेशान कर रहा था।
“लेला, मुझे पता है तुम अंदर हो। दरवाज़ा खोलो।” ब्रायन ने दरवाज़े पर इतनी ज़ोर से मुक्के मारे कि चौखट में वह थरथराने लगा।
लेला की नाज़ुक भौंहें सिकुड़ गईं। उसने बर्फ़ीली बेरुख़ी से जवाब दिया, “क्या चाहिए तुम्हें?”
वीडियो इंटरकॉम पर उसे दिखा—ब्रायन लड़खड़ा रहा था; साफ़ था कि वह नशे में था।
जब से सूसन लेला के यहाँ आकर रहने लगी थी और बेहतर ज़िंदगी का मज़ा लेने लगी थी, ब्रायन भी उस पर निर्भर हो गया था। अब वह सूसन के साथ ही रहता था और लेला को “छोटी बहन” कहकर बुलाने लगा था।
ब्रायन से लेला की पहली मुलाक़ात उन अटपटे डिनरों में हुई थी, जो सूसन “माँ-बेटी का रिश्ता मज़बूत करने” के नाम पर रखती थी। मगर लेला जानती थी—सूसन का असली मक़सद बस यही था कि उसे नरम करके उससे और पैसे निकलवाए जाएँ।
उन्हीं डिनरों के ज़रिए ब्रायन उसकी ज़िंदगी में घुस आया था। शुरुआत में वह उसे खुली वासना भरी नज़रों से घूरता रहता, लेकिन जब उसे पता चला कि लेला की शादी सेथ से है, तो वह पीछे हट गया।
फिर जैसे-जैसे उसे एहसास हुआ कि सेथ को लेला की कोई परवाह नहीं, उसके इशारे और हरकतें और ढीठ होती गईं—कई बार तो उसने उसे छूने की कोशिश भी की। हर बार लेला किसी तरह बच निकली।
उन घटनाओं के बाद लेला ने अपनी माँ के यहाँ जाना ही बंद कर दिया। सूसन को अगर पैसे चाहिए होते, तो वह बस ट्रांसफ़र कर देती।
आज रात ब्रायन का यूँ अचानक आ जाना लेला को समझ नहीं आया। वह साफ़ तौर पर जानता था कि सेथ घर पर नहीं है—मगर उसे यह कैसे पता चला?
वह उसे टालने का बहाना ढूँढ़ ही रही थी कि ब्रायन फिर बोला, “हो सकता है तुम मुझसे बात न करना चाहो, लेकिन अपनी माँ की तो फिक्र करनी चाहिए। कल रात उसे शराब पीकर गाड़ी चलाने और एक अफ़सर पर हाथ उठाने के केस में गिरफ्तार कर लिया गया। अभी भी लॉकअप में है। सोचा तुम्हें बता दूँ।”
एक पल में लेला की पुतलियाँ सिकुड़ गईं। कानों में जैसे भारी गूँज भर गई और दिमाग़ सुन्न पड़ गया। वह सूसन को अच्छी तरह जानती थी—वह ऐसी लापरवाही कर ही सकती थी।
बेइख़्तियार उसने दरवाज़ा खोल दिया और घबराकर पूछा, “वो किस थाने में है?”
ब्रायन ने दुष्ट-सी मुस्कान के साथ अंदर धक्का दिया, दरवाज़ा पीछे से पटक दिया और झट से लेला को बाहों में जकड़ लिया।
“हा! तेरी माँ का नाम लेना हमेशा काम कर जाता है,” वह हँसा।
समझते ही कि उसके साथ चाल चली गई है, लेला की आँखों में दहशत चमक उठी। वह पूरी ताक़त से छटपटाई। “हरामज़ादे! छोड़ मुझे! छोड़ दे!”
लेकिन ब्रायन ने उसे कसकर पकड़ रखा था; उसकी छूटने की कोशिशें उसके आगे कुछ भी नहीं थीं। वह उसे घसीटकर सोफ़े तक ले गया, जैसे उसका कोई वज़न ही न हो, और उसे पटक दिया। लेला उठने को हुई, मगर वह तुरंत उसके नीचे दबा दी गई।
ब्रायन ने जबरन उसके होंठों पर चुंबन थोपने शुरू किए और उसके शरीर को टटोलने लगा। लेला चीख़ी और बेतहाशा हाथ-पाँव मारने लगी; उसका खूबसूरत चेहरा नफ़रत और बेबसी से बिगड़ गया, गालों पर आँसू बह निकले।
“कमीने! छोड़ दे! छोड़ दे!”
वह चाहे जितना छटपटाई, सब बेकार लग रहा था। जब ब्रायन ने उसकी ब्लाउज़ ऊपर सरकाई और उसकी पजामा पैंट नीचे खींचने लगा, लेला के मुँह से एक दहशत भरी चीख़ निकल गई।
घबराहट में उसकी नज़र पास की साइड टेबल पर रखे महँगे क्रिस्टल के गुलदान पर पड़ी—जिस पर घर के सादे, सुकूनभरे सजावटी अंदाज़ की छाप थी। उसने झपटकर उसे पकड़ा और पूरी ताक़त से ब्रायन के सिर पर दे मारा।
गुलदान ज़ोरदार आवाज़ के साथ चकनाचूर हो गया। ब्रायन दर्द से तड़पकर चिल्लाया, सिर पकड़कर फर्श पर गिर पड़ा। उसके माथे से खून बहता हुआ लकड़ी के फर्श पर फैलने लगा।
लेला हाँफती हुई सोफ़े से फिसलकर उठी। उसने टेबल से फल काटने वाला चाकू उठाया और चीख़ी, “निकल यहाँ से, हरामज़ादे!”
ब्रायन लड़खड़ाता हुआ उठ खड़ा हुआ, उसके चेहरे से खून टपक रहा था। लैला के हाथ में चाकू देखकर वह दाँत पीसकर गुर्राया, “कमीनी! इसकी कीमत चुकाओगी! क्या? मुझे मार देगी? हाँ, मार के दिखा! करके देख!”
लैला ने चाकू को कसकर थाम रखा था, उसकी छाती तेज़-तेज़ उठ-गिर रही थी। “यहाँ सिक्योरिटी कैमरे हैं! सेथ तुम्हें मुझे नुकसान पहुँचाकर बच निकलने नहीं देगा!”
यह धमकी ब्रायन को ज़रा भी नहीं डरा सकी। वह उपहास से हँसा, “सब जानते हैं सेथ को तुम्हारी कोई परवाह नहीं। तुम्हें लगता है उसे फर्क पड़ता है?”
लैला का चेहरा फीका पड़ गया, वह हाँफते हुए तेजी से साँस लेने लगी। “वह मेरी परवाह करे या न करे, मैं फिर भी उसकी पत्नी हूँ! अगर तुमने मुझे चोट पहुँचाई, तो यह उसका अपमान होगा! इसके लिए वह तुम्हें मिट्टी में मिला देगा!”
यह बात आखिरकार ब्रायन तक पहुँचती दिखी। उसके चेहरे पर डर की एक झलक आई, और उसकी नजरें इधर-उधर दौड़ने लगीं, जैसे सिक्योरिटी कैमरे ढूँढ़ रहा हो।
डरते हुए कि कहीं वह उसे झूठा न समझ ले, लैला ने अपनी पकड़ और कस ली। “अभी निकल जाओ, वरना मैं माँ के पैसे पूरी तरह बंद कर दूँगी। तुम्हें एक पैसा भी नहीं मिलेगा। और तुम जेल जाओगे—बलात्कार की सज़ा कम से कम दस साल होती है! मैं सच कह रही हूँ!”
ब्रायन गुस्से से उबल रहा था, लेकिन उसकी आरामदेह ज़िंदगी पर पड़ने वाला खतरा काफी था।
वह बड़बड़ाते हुए गालियाँ देने लगा, अपने बहते खून वाले सिर को थामे, और लड़खड़ाता हुआ घर से बाहर निकल गया।
लैला दौड़कर दरवाज़ा बंद करने पहुँची, फिर उसके सहारे फिसलती हुई नीचे बैठ गई।
उसका हाथ अब भी चाकू को भींचे हुए था, और बुरी तरह काँप रहा था—वह भीतर तक दहशत में थी।
कुछ मिनटों बाद, इस सब के बाद उसके दिमाग में सबसे पहले सेथ का खयाल आया। काँपते हाथों से वह ऊपर गई, अपना फोन उठाया और उसे बार-बार कॉल करने लगी।
हर कॉल कट जाती। वह हार मानने ही वाली थी कि एक मैसेज आ गया:
सेथ: [मैं बिज़ी हूँ। फिर कॉल किया तो तुम्हारा नंबर ब्लॉक कर दूँगा।]
इन कुछ शब्दों ने लैला को लगभग तोड़ दिया। वह फर्श पर दुबक गई, उसका पूरा शरीर बेकाबू काँप रहा था, और वह सिसकियाँ दबाने की कोशिश करती रही। “सेथ, तुम मेरे साथ ऐसा क्यों करते हो? मैंने क्या गलत किया?”
उसी वक्त उसके फोन की स्क्रीन पर एक न्यूज़ अलर्ट उभरा:
#स्टैन्टन इंडस्ट्रीज़ के सीईओ ने गर्लफ्रेंड को कस्टम पिंक रोल्स-रॉयस तोहफे में दी, समुद्र किनारे रोमांटिक किस कैमरे में कैद#
उस हेडलाइन ने जैसे लैला की आँखों के सामने अँधेरा कर दिया। वह जड़ हो गई, फिर सीने को ऐसे पकड़ लिया मानो सचमुच चोट लगी हो, हवा के लिए हाँफने लगी, और बड़े-बड़े आँसू उसके गालों पर बह निकले।
तो वह अब भी उसी के साथ था...
ठीक उसी पल, जैसे इशारे पर, सूसन का कॉल आ गया। लैला का जवाब देने का इरादा नहीं था, लेकिन उसका हाथ अनजाने में स्क्रीन पर फिसल गया। सूसन की घबराई हुई आवाज़ कानों में पड़ी। “लैला! ये क्या खबर है? सेथ उस जेनिफर पार्कर के साथ क्यों है? ये सब क्या चल रहा है? और वो गाड़ी तो करोड़ों की होगी!”
उसकी माँ—और सबसे पहली चिंता बेटी की सलामती नहीं, पैसे। लैला ने कड़वी हँसी हँसी, उसकी आँखों में बस अंतहीन दुख और खालीपन था।
“क्या तुम्हें पता है ब्रायन ने आज रात क्या किया?” उसने धीमे से पूछा।
फोन पर सन्नाटा छा गया। करीब पंद्रह सेकंड बाद सूसन की हकलाती आवाज़ लौटी। “मैं… मैंने तो बस उसे कहा था कि तुम्हें देख आए। शायद कुछ पैसे भी ले आए। तुम्हें पता है, मैंने अभी एक गाड़ी ली है, और मेरे पास पैसे कम पड़ रहे हैं।”
“तुम और मैं—हमारे बीच हर बात बस पैसे की ही होती है, है न?” लैला की आवाज़ खोखली थी।
सूसन का लहजा झुंझलाया हुआ हो गया। “मैं तुम्हारी माँ हूँ, और तुम्हारा मुझे पैसे देना तो स्वाभाविक है। अब मुझे बताओ सेथ का क्या मामला है! वो रोल्स-रॉयस तो करोड़ों की होगी! तुम उसकी पत्नी हो; तुम्हें कुछ करना चाहिए!”
माँ के इस रवैये ने लैला को पूरी तरह बेबस कर दिया। कड़वी मुस्कान के साथ उसने कहा, “हँ… लगता है कानूनी पत्नी होकर भी मेरी कीमत उसकी रखैल से कम है।”
